
डिजिटल डेस्क। मध्य प्रदेश में आगामी वर्षों में संभावित बिजली संकट से निपटने और राज्य के औद्योगिक विकास को गति देने के लिए डॉ. मोहन यादव कैबिनेट ने एक बड़ा फैसला लिया है। सोमवार (22 सितंबर) को आयोजित कैबिनेट बैठक में राज्य सरकार ने 2,800 मेगावाट थर्मल बिजली (तापीय ऊर्जा) खरीदने के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी।
एक राष्ट्रीय स्तर की एजेंसी द्वारा जारी पावर मैनेजमेंट कंपनी की रिपोर्ट के अनुसार, हालांकि वर्तमान में मध्य प्रदेश में अतिरिक्त (सरप्लस) बिजली उपलब्ध है, लेकिन शहरों के तेजी से होते विस्तार, सेमीकंडक्टर और टेलीकॉम जैसे आधुनिक उद्योगों की स्थापना के कारण वर्ष 2037 तक राज्य में करीब 1,900 मेगावाट बिजली की कमी हो सकती है।
चूंकि थर्मल पावर प्लांट स्थापित होने में 5 से 7 साल का समय लगता है, इसलिए सरकार ने दूरगामी सोच के साथ 1,900 मेगावाट नई बिजली की खरीद और 900 मेगावाट के पुराने करार को मिलाकर कुल 2,800 मेगावाट बिजली खरीद का ऐतिहासिक निर्णय लिया है।
भविष्य में घरों में इलेक्ट्रॉनिक्स, एसी और कूलरों की बढ़ती खपत के बावजूद पीक आवर्स (गर्मियों) में अघोषित बिजली कटौती, ट्रिपिंग या लो-वोल्टेज की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा।
सेमीकंडक्टर, टेलीकॉम और भारी उद्योगों को निर्बाध (कटौती-मुक्त) बिजली की गारंटी मिलने से देश-विदेश की बड़ी कंपनियां मध्य प्रदेश में अपने नए प्लांट लगाएंगी। इससे स्थानीय स्तर पर नौकरियों और स्वरोजगार के ढेरों अवसर पैदा होंगे।
इमरजेंसी या अंतिम समय में महंगी बिजली खरीदने से सरकार पर जो आर्थिक बोझ पड़ता था, उसका असर सीधे जनता के बिलों पर होता था। लंबी अवधि के इस एग्रीमेंट (PPA) से सरकार को सस्ती और तय दरों पर बिजली मिलेगी, जिससे भविष्य में बिजली की दरों में अचानक बड़ी बढ़ोतरी का खतरा टल जाएगा।
शहरों के विस्तार के साथ-साथ तेजी से बढ़ रहे इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs), ई-बसों और सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों के संचालन के लिए आवश्यक अतिरिक्त बिजली की आपूर्ति अब बिना किसी रुकावट के संभव हो सकेगी।
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