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एमपी में जनगणना-2027 का पहला चरण पूरा, 7 लाख से अधिक परिवारों ने खुद दर्ज कराई ऑनलाइन जानकारी

मध्य प्रदेश में जनगणना-2027 के पहले चरण के तहत मकान सूचीकरण और मकानों की गणना का कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है।

By Madanmohan malviyaEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Tue, 09 Jun 2026 08:37:34 PM (IST)Updated Date: Tue, 09 Jun 2026 08:37:34 PM (IST)
एमपी में जनगणना-2027 का पहला चरण पूरा, 7 लाख से अधिक परिवारों ने खुद दर्ज कराई ऑनलाइन जानकारी
एमपी में जनगणना-2027 (ये तस्वीर एआई से बनाई गई है)

नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मध्य प्रदेश में जनगणना-2027 के पहले चरण के तहत मकान सूचीकरण और मकानों की गणना का कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। एक मई से शुरू हुए इस व्यापक अभियान में प्रदेश के सात लाख से अधिक परिवारों ने स्व-गणना प्रक्रिया के तहत स्वयं अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कराई। पूरी प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से संचालित किया गया, जिससे जनगणना कार्य को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा सका।

जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश में एक मई से 30 मई तक चले इस अभियान के दौरान प्रत्येक गांव और नगरीय क्षेत्र में मकानों, परिवारों और निवासियों से संबंधित निर्धारित जानकारी एकत्र की गई। यह कार्य प्रदेश के सभी 55 जिलों, 425 नगरीय निकायों और 449 तहसीलों के अंतर्गत आने वाले 54 हजार 923 गांवों में संपन्न हुआ। इसके लिए एक लाख 44 हजार से अधिक प्रगणकों और पर्यवेक्षकों की तैनाती की गई थी, जबकि लगभग 15 हजार अतिरिक्त प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों को रिजर्व के रूप में रखा गया था।


स्व-गणना (सेल्फ एन्यूमरेशन) में डिजिटल जनभागीदारी की बड़ी उपलब्धि

जनगणना के पहले चरण से पहले 16 अप्रैल से 30 अप्रैल तक स्व-गणना (सेल्फ एन्यूमरेशन) की प्रक्रिया संचालित की गई थी। इस दौरान प्रदेश के सात लाख से अधिक परिवारों ने स्वयं पोर्टल पर जाकर अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज की। अधिकारियों के अनुसार डिजिटल जनभागीदारी के लिहाज से यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

33 बिंदुओं के माध्यम से हुई मकानों की गणना

पहले चरण में अधिसूचित 33 बिंदुओं के माध्यम से मकानों की स्थिति, निर्माण की प्रकृति, उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं, घरेलू उपयोग की सामग्रियों व अन्य आवश्यक जानकारी मोबाइल ऐप के जरिए डिजिटल रूप से संकलित की गई। जनगणना-2027 की यह प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल तकनीक पर आधारित है, जिससे आंकड़ों के संकलन और विश्लेषण में तेजी आएगी।

पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी

जिला जनगणना अधिकारी भुवन गुप्ता ने बताया कि जनगणना के दौरान एकत्र की गई सभी व्यक्तिगत जानकारियां जनगणना अधिनियम-1948 और जनगणना नियमावली-1990 के तहत पूरी तरह गोपनीय रहेंगी। इन आंकड़ों का उपयोग केवल नीति निर्माण, विकास योजनाओं की रूपरेखा तैयार करने तथा जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए किया जाएगा।

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