
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। मध्य प्रदेश में अगले वर्ष होने वाले निकाय चुनाव जनगणना के कारण प्रभावित हो सकते हैं। इसकी वजह वार्ड से लेकर नगर परिषद, नगर पालिका और नगर निगमों की आरक्षण प्रक्रिया है। इसकी प्रक्रिया शुरू करने का समय आ चुका है लेकिन जनगणना का कार्य चलने के कारण राज्य सरकारइसे आगे बढ़ा सकती है।
दरअसल, जनगणना के बाद नए वार्ड बनेंगे और वर्तमान नगरीय निकायों की सीमाएं भी परिवर्तित होंगी। इसे देखते हुए चुनाव छह माह के लिए आगे बढ़ाए जा सकते हैं। हाल ही में कानून व्यवस्था और वर्षा की स्थिति का हवाला देकर कुछ निकायों के चुनाव स्थगित कराए गए हैं।
प्रदेश में 16 नगर निगम, 99 नगर पालिका व 298 नगर परिषद मिलाकर 413 नगरीय निकाय हैं। इनके महापौर, अध्यक्ष के साथ 7,679 वार्ड पार्षद पद के लिए चुनाव कराए जाने हैं। इस बार नगर पालिका और नगर परिषद के अध्यक्ष का चुनाव भी प्रत्यक्ष प्रणाली यानी सीधे मतदाताओं द्वारा कराया जाएगा।
एससी-एसटी और ओबीसी के साथ महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण रहेगा। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने महापौर और अध्यक्ष पद के आरक्षण के लिए विभाग ने आयुक्त, नगरीय प्रशासन एवं विकास को विहित प्राधिकारी घोषित कर दिया है।
चूंकि, जनगणना की प्रक्रिया चल रही है इसलिए न तो वार्ड परिसीमन हो सकता है और न ही नए नियम बनाए जा सकते हैं। जबकि, सरकार द्वारा कुछ पंचायतों को मिलाकर नगर परिषद बनाने की घोषणा की है। जनगणना की प्रक्रिया पूरी होने तक इनका गठन नहीं हो सकता।
उधर, राज्य निर्वाचन आयोग के अधिकारियों का कहना है कि आरक्षण की प्रक्रिया करना सरकार का काम है। हम चुनाव कराने वाली संस्था हैं। पांच वर्ष की अवधि पूर्ण होने से पहले हमें चुनाव कराना होता है। हमने मतदाता सूची अद्यतन कर ली है। सरपंच तक के चुनाव के लिए ईवीएम खरीदने का प्रस्ताव सरकार को भेजा है। यदि समय रहते ईवीएम उपलब्ध हो जाती है तो सारे चुनाव इसी से कराए जाएंगे।
सूत्रों का कहना है कि सरकार चुनाव को लेकर किसी भी प्रकार की जल्दबाजी नहीं करना चाहती है, इसलिए सहकारी समितियों के चुनाव भी हाई कोर्ट द्वारा बार-बार निर्देश देने के बाद भी नहीं कराए जा रहे हैं। नगरीय निकाय के चुनाव दलीय आधार पर होते हैं। इसके परिणामों को असर राजनीतिक दलों की विधानसभा चुनाव की तैयारी के साथ वातावरण पर पड़ता है।
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वर्ष 2022 के चुनाव में महापौर पद का चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली यानी सीधे मतदाताओं के माध्यम से हुआ था। 16 में से पांच नगर निगमों में कांग्रेस के महापौर चुने गए थे, जबकि सिंगरौली नगर निगम में महापौर आम आदमी पार्टी की रानी अग्रवाल जीती थीं।