
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों से लेकर उप स्वास्थ्य केंद्रों तक दवाओं के भंडारण और आपूर्ति को व्यवस्थित करने के लिए सभी 10 संभागीय मुख्यालयों में वेयरहाउस निर्माण के लिए निविदा जारी हो गई है। इस वर्ष के अंत तक निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है। अगले वर्ष अक्टूबर-नवंबर तक इनमें दवाओं का भंडारण शुरू करने का लक्ष्य है। आगे छह माह की आवश्यकता के अनुसार दवाएं खरीद कर यहां रखी जाएंगी। इससे अस्पतालों में दवाओं की कमी नहीं होने पाएगी।
साथ ही भंडारण और वितरण की निगरानी भी बेहतर हो सकेगी। वेयरहाउस से मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) और सिविल सर्जन की मांग के अनुसार निर्धारित मात्रा में तीन माह के लिए दवाएं और अन्य सामग्री जैसे गॉज, बैंडेज, सैनिटाइजर आदि उपलब्ध कराई जाएगी। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि वेयरहाउस निर्माण की प्रक्रिया चल रही है। छह माह की आवश्यकता का आकलन कर दवाओं का स्टॉक रखा जाएगा।
छह माह की आवश्यकता के अनुसार भंडार होने से यह लाभ होगा कि दवाओं की तीन स्तर पर जांच होने के बाद ही ओपीडी या भर्ती रोगियों को दी जाएगी। अभी एक तो कंपनी खुद अपनी लैब से दवा की जांच कर गुणवत्ता प्रमाण पत्र देती है। दूसरा राज्य सरकार द्वारा अनुबंधित एनएबीएल (नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर लैबोरेटरी) प्रमाणित लैब में जांच करानी होती है। यह दो रिपोर्ट मानक के अनुसार होने पर दवाओं का वितरण किया जाता है। बाद में स्टोर से सैंपल राज्य या केंद्र की शासकीय लैब में भेजे जाते हैं। इनमें प्रतिवर्ष 15 से 20 दवाएं अमानक मिल रही हैं।
जब तक जांच रिपोर्ट आती है उस बैच की 50 प्रतिशत से भी अधिक दवा बंट चुकी होती है। इसके बाद दवाओं के वितरण पर रोक लगाई जाती है। अब तीसरी रिपोर्ट भी मानक के अनुसार आने पर ही दवाओं का वितरण किया जाएगा। अभी किसी जिले में दवा की कमी होने पर दूसरे जिले से भेजी जाती है, अब स्टोर से ही जहां ज्यादा आवश्यकता होगी वहां अधिक दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
यह भी पढ़ें- अलमारी से निकले 66 लाख कैश और सोने-चांदी के जेवर, GST अधिकारी मनीष जैन के ठिकानों पर लोकायुक्त का छापा