
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। नौ माह से राज्य कर्मचारी दो प्रतिशत महंगाई भत्ता बढ़ाने, अनुकंपा नियुक्ति और पदोन्नति में सीपीसीटी की अनिवार्यता समाप्त करने सहित अन्य कई मांगें कर रहे हैं लेकिन सरकार द्वारा निर्णय नहीं लेने से नाराजगी है। 20 सितंबर को भोपाल में तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ की प्रदेश महासमिति की बैठक बुलाई गई है। इसमें आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी।
संघ के प्रांतीय महामंत्री उमाशंकर तिवारी का कहना है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अनुकंपा नियुक्ति और पदोन्नति में सीपीसीटी की अनिवार्यता समाप्त करने के निर्देश सामान्य प्रशासन विभाग को दे चुके हैं लेकिन अब तक विभाग ने कोई आदेश, स्पष्टीकरण जारी नहीं किया है।
इसी तरह हाई कोर्ट बार-बार नवनियुक्त तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को प्रथम वर्ष में 70, द्वितीय में 80 और तृतीय वर्ष में 90 प्रतिशत वेतन के प्रविधान पर आपत्ति जता रहा है। सामान्य प्रशासन विभाग के इससे संबंधित 2019 के परिपत्र को निरस्त भी कर दिया है लेकिन इस पर कोई निर्णय अभी तक नहीं लिया गया है।
भारत सरकार जनवरी 2026 से अपने कर्मचारियों और पेंशनरों को 62 प्रतिशत की दर से महंगाई भत्ता व राहत दिया जा रहा है लेकिन प्रदेश के कर्मचारियों को 60 प्रतिशत की दर से ही भुगतान हो रहा है। नौ माह से इसमें वृद्धि की मांग की जा रही है मगर अब तक निर्णय नहीं लिया गया। कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू करने की मांग भी वर्षों से लंबित है।