
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। करीब 1.55 करोड़ रुपये के कथित मेस भुगतान फर्जीवाड़े में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) की कार्रवाई सवालों के घेरे में है। ईओडब्ल्यू ने 27 मई 2026 को सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी, लेकिन तीन महीने से ज्यादा समय बीतने के बाद भी मामले में जांच की दिशा और कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पीड़ित कंपनी का आरोप है कि जिस कथित फर्जी फर्म के खाते में भुगतान ट्रांसफर कराया गया, उसके बैंक खाते और उससे जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड को अब तक प्रभावी ढंग से सुरक्षित नहीं किया गया। यही वजह है कि सबूतों को सुरक्षित कराने के लिए कंपनी को अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
ईओडब्ल्यू ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की संबंधित धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत गौरव शर्मा, हर्ष सरजानी, कुलदीप शुक्ला, पूर्व प्राचार्य विजय सिंह महोदिया, संतोष सिंह सिसोदिया, वीरेंद्र दुबे और पूर्व अकाउंटेंट लीना विश्वकर्मा को आरोपित बनाया है।
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद कथित फर्जी खाते और उसमें हुए लेनदेन को सुरक्षित करने के लिए क्या कार्रवाई की गई? पीड़ित कंपनी का आरोप है कि खाते को सुरक्षित या अटैच करने व पूरे मनी ट्रेल को संरक्षित करने के लिए समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। रकम आगे किन खातों में गई और इस लेनदेन से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका क्या रही, इसका भी अभी खुलासा नहीं हुआ है।
एफआईआर को तीन महीने से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन पीड़ित कंपनी के अनुसार अब तक चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है। कंपनी को आशंका है कि बैंकिंग रिकॉर्ड और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज सुरक्षित नहीं किए गए तो जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य प्रभावित हो सकते हैं।
कंपनी की ओर से अधिवक्ता शुभांक दीक्षित और अंकुर पांडेय ने अदालत में आवेदन देकर बैंक केवाईसी, अकाउंट खोलने के दस्तावेज, प्रमाणित बैंक स्टेटमेंट, पूरा ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड, मूल भुगतान वाउचर, चेक लीव्स, नोटशीट और संबंधित विभागों के पत्राचार को सुरक्षित कराने की मांग की है।
ईओडब्ल्यू के मामले के अनुसार भोपाल और इंदौर के श्रमोदय विद्यालयों में मेस संचालन का ठेका कंका फूड मैनेजमेंट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को मिला था। आरोप है कि इसी से मिलता-जुलता नाम रखकर "कंका फूड मैनेजमेंट सर्विसेज" नाम से दूसरी फर्म हर्ष सरजानी के नाम पर तैयार की गई और इंदौर में एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में खाता खोला गया।
जांच के अनुसार 27 जून 2024 के कथित फर्जी लेटरहेड के जरिए भविष्य के मेस भुगतान नए खाते में ट्रांसफर कराने का अनुरोध किया गया। आरोप है कि भुगतान नोटशीट में वास्तविक कंपनी का नाम होने के बावजूद चेक में "प्राइवेट लिमिटेड" शब्द हटा दिया गया, जिससे भुगतान कथित दूसरी फर्म के खाते में जाने का रास्ता बना।