
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। कई बार इलेक्ट्रानिक माध्यम से होने वाले भुगतान असफल हो जाते हैं। इस राशि की वापसी के लिए वित्त विभाग ने मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) निर्धारित कर दी है। प्रत्येक असफल ई-भुगतान की राशि संबंधित वेंडर या कर्मचारी के विवरण के साथ असफल ई-भुगतान के नाम से अलग खाते में दर्ज की जाएगी। आहरण एवं संवितरण अधिकारी (डीडीओ) को मामलों का सत्यापन कर संबंधित राशि के पुनर्भुगतान की प्रक्रिया शुरू करनी होगी।
असफल भुगतान की राशि की वापसी के लिए 365 दिनों की समय-सीमा निर्धारित की गई है। वहीं, विभागाध्यक्ष अथवा बजट नियंत्रण अधिकारी के स्तर पर इसके निराकरण की अधिकतम अवधि 730 दिन रखी गई है। वित्त विभाग द्वारा जारी निर्देश के अनुसार डीडीओ को असफल संव्यवहारों का सत्यापन, बैंक खातों का विवरण अद्यतन करने और पुनर्भुगतान के लिए एमपीटीसी-31 में देयक प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी दी गई है।
365 दिन बाद भी मामला लंबित रहने पर संबंधित विभागाध्यक्ष या बजट नियंत्रण अधिकारी को देरी का कारण दर्ज करते हुए ई-फाइल के माध्यम से प्रस्ताव भेजना होगा। यदि 730 दिनों की अवधि में असफल ई-भुगतान की राशि वापस नहीं कराई जाती और राशि फ्रीज रहती है तो उसे राजस्व प्राप्ति मद में जमा करने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। ऐसे मामलों में असफल भुगतान के संव्यवहारकर्ता के विरुद्ध अलग चालान तैयार कर राशि जमा की जाएगी।
किसी एक वेंडर या कर्मचारी से संबंधित असफल ई-भुगतान की राशि किसी दूसरे वेंडर या कर्मचारी के खाते में स्थानांतरित नहीं की जाएगी। साथ ही यदि पूर्व में किसी अन्य माध्यम से राशि वापस हो चुकी हो, तो दोहरे भुगतान की स्थिति नहीं बनने देने की जिम्मेदारी संबंधित आहरण एवं संवितरण अधिकारी की होगी।
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