डिजीटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने सरकारी इंटरनेट कम्युनिकेशन व्यवस्था में बदलाव की पहल की है। बढ़ते साइबर हमलों और अनधिकृत एक्सेस के खतरे को देखते हुए सरकार ने नए नियम लागू कर दिए हैं। इसके तहत राज्य के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए स्वदेशी मेल प्लेटफॉर्म जोहो (Zoho) का उपयोग अनिवार्य कर दिया गया है।
इस कदम का उद्देश्य सरकारी संचार व्यवस्था की सुरक्षा मजबूत करना और विदेशी क्लाउड स्टोरेज पर निर्भरता कम करना है।
डिजीटल संचार व्यवस्था की सुरक्षा की पहल
यह पहल केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (एनआईसी) के उस राष्ट्रीय प्रोजेक्ट के तहत की गई है, जिसके माध्यम से सरकारी डिजीटल संचार व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम (एमपी-एसईडीसी) और एनआईसी के बीच हाल ही में भोपाल में हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इनके अनुसार, राज्य के सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को आधिकारिक ईमेल संचार के लिए निर्धारित जोहो प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करना होगा।
सरकार के इस फैसले को सरकारी डेटा की सुरक्षा, डिजिटल संचार पर नियंत्रण और साइबर खतरों से बचाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, नई व्यवस्था के क्रियान्वयन, पुराने ईमेल खातों के स्थानांतरण और विभागों में इसे पूरी तरह लागू करने की प्रक्रिया से जुड़ी विस्तृत जानकारी उपलब्ध दिशा-निर्देशों के आधार पर स्पष्ट होगी।
मप्र सरकार की नई ईमेल व्यवस्था के मुख्य बिंदु
45 दिन में इनएक्टिव होगा अकाउंट
नई व्यवस्था के अनुसार प्रत्येक यूजर (सरकारी अधिकारी-कर्मचारी) को एक महीने में कम से कम एक बार अपनी ईमेल आईडी का उपयोग करना अनिवार्य है। यदि कोई अधिकारी-कर्मचारी लगातार 45 दिनों तक अपने ईमेल इनबॉक्स में लॉगिन नहीं करता है, तो सुरक्षा कारणों से वह ईमेल खाता स्वतः इनएक्टिव हो जाएगा।
वार्षिक सेवा शुल्क
प्रत्येक मेल-बॉक्स आधारित ईमेल आईडी के मेंटेनेंस पर राज्य सरकार प्रति यूजर 2 हजार रुपये वार्षिक सेवा शुल्क का भुगतान करेगी।
नहीं बदलेंगे सरकारी डोमेन
इस बदलाव से अधिकारियों के ईमेल पतों के डोमेन में कोई बदलाव नहीं होगा। ईमेल आईडी के अंत में लगने वाला आधिकारिक डोमेन (जैसे @nic.in या @mp.gov.in) पहले की तरह ही रहेगा। केवल इसका बैकएंड इंफ्रास्ट्रक्चर और सर्वर अब गूगल या माइक्रोसॉफ्ट के बजाय स्वदेशी प्लेटफॉर्म जोहो के सुरक्षित क्लाउड प्लेटफॉर्म से संचालित होगा।
डेटा रहेगा देश के भीतर और सुरक्षित
जोहो एक भारतीय निजी आईटी एवं सॉफ्टवेयर कंपनी है, जिसके सर्वर भारत में ही स्थित हैं। यह एनआईसी के रणनीतिक नियंत्रण के तहत काम करती है और सर्ट-इन (CERT-In) के सुरक्षा ऑडिट व जीरो-ट्रस्ट आर्किटेक्चर नियमों का पालन करती है, जिससे सरकारी संवेदनशील डेटा देश की सीमाओं के भीतर सुरक्षित रहेगा।
मिलेगा डेडीकेटेड इनबॉक्स
बदलाव के बाद अब प्रत्येक अधिकारी को एक डेडीकेटेड इनबॉक्स और सुरक्षित क्लाउड स्टोरेज की सुविधा मिलेगी, जिससे डेटा लीक की संभावना खत्म होगी।