
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) के दायरे में आने वाले प्रदेश के साढ़े चार लाख से अधिक अधिकारियों-कर्मचारियों को सरकार एकीकृत पेंशन योजना (यूपीएस) का विकल्प दे सकती है। भारत सरकार अप्रैल 2025 से इस योजना को लागू कर चुकी है।
इसे प्रदेश में लागू करने के विकल्पों पर विचार करने के लिए अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव की अध्यक्षता में समिति कर्मचारी संगठनों से विचार-विमर्श करने के साथ अन्य राज्यों के प्रविधान का अध्ययन कर रही है। रिपोर्ट दिसंबर के अंत में सरकार को सौंपी जाएगी।
पुरानी पेंशन बहाली की मांग के बीच प्रदेश सरकार ने भारत सरकार द्वारा अप्रैल से प्रभावी की गई एकीकृत पेंशन योजना का विकल्प प्रदेश के कर्मचारियों को देने से जुड़े सभी पहलुओं पर विचार करके अनुशंसा देने के लिए समिति बनाई है। समिति अन्य राज्यों के प्रविधानों का अध्ययन करने के साथ विभिन्न कर्मचारी संगठनों से भी विचार-विमर्श कर रही है। दरअसल, एकीकृत पेंशन योजना को लेकर प्रदेश के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी भी अधिक उत्साहित नहीं हैं।
जबकि, इसमें दस वर्ष की सेवा पूर्ण होने पर दस हजार रुपये मासिक की निश्चित पेंशन गारंटी दी गई है। यदि किसी कर्मचारी ने 25 साल तक सेवा की है, तो उसे सेवानिवृत्ति से पहले के अंतिम 12 महीनों के औसत मूल वेतन का 50 प्रतिशत हिस्सा निश्चित पेंशन के रूप में मिलेगा। यदि पेंशनभोगी कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है, तो उसके स्वजन को मिलने वाली पेंशन का 60 प्रतिशत हिस्सा मासिक पारिवारिक पेंशन के रूप में दिया जाएगा। यह प्रविधान राष्ट्रीय पेंशन योजना में नहीं हैं।
सरकार की सोच है कि प्रदेश के कर्मचारियों को भी सेवानिवृत्त होने के बाद निश्चित पेंशन की गारंटी मिले, इसलिए समिति बनाई गई है। मनु श्रीवास्तव का कहना है कि हम प्रशासनिक और वित्तीय पहलुओं का आकलन कर रहे हैं। कर्मचारी संगठनों से भी विचार-विमर्श किया जा रहा है। निर्धारित समयसीमा में रिपोर्ट शासन को सौंप दी जाएगी।