
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर के सराफा बाजार में सोने की तस्करी से जुड़े मामले में डीआरआइ (डायरेक्टर आफ रेवेन्यु इंटेलीजेंस) की जांच में नई जानकारी सामने आई है। एजेंसी के मुताबिक एक ज्वेलर्स ने पिछले तीन साल में करीब 90 किलो सोना खरीदा। इसकी कीमत 100 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है।
आशंका इस बात की है कि यह सोना विदेश से तस्करी कर भारत लाया गया था। बाद में ज्वेलरी कारोबार के जरिए इसे बाजार में बेचा गया। मामले में आरोपित कारोबारी दीपक खंडेलवाल और उसके बेटे नकुल खंडेलवाल को जमानत देने से विशेष न्यायालय ने इनकार कर दिया है। दोनों ने जमानत के लिए आवेदन प्रस्तुत किया था जिसे कोर्ट ने निरस्त कर दिया। हालांकि दोनों पिता-पुत्र पूछताछ में तस्करी के सोने खरीद से इनकार कर रहे हैं।
डीआरआइ को सूचना मिली थी कि कुछ लोग महाराष्ट्र से सोना लेकर इंदौर आ रहे हैं। 14 अगस्त 2026 को डीआरआइ की टीम को एक कार की जांच के दौरान फ्रंट सीट के नीचे रखे बाक्स में सोने के तीन बिस्किट मिले थे। इसकी अनुमानित कीमत 4.72 करोड़ रुपये बताई जा रही है। डीआरआइ ने कार में सवार रोमेल और यश लालवानी को गिरफ्तार किया। पूछताछ में यह बात सामने आई थी कि यह सोना सराफा कारोबारी दीपक खंडेलवाल को बेचा जाना था।
जांच के दौरान डीआरआइ ने दीपक खंडेलवाल और नकुल खंडेलवाल को 19 अगस्त को राजस्थान के कोटा से गिरफ्तार किया था। पूछताछ में निखिल लालवानी के जरिए पिछले तीन साल में करीब 90 किलो सोना खरीदने की बात सामने आई।
इसकी कीमत 100 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। इस बात की आशंका भी है कि यह सोना विदेश से तस्करी कर भारत लाया गया था। इसके बाद इसे खरीदकर ज्वेलरी कारोबार के माध्यम से बाजार में बेचा गया।
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डीआरआइ की ओर से पैरवी कर रहे विशेष लोक अभियोजक चंदन ऐरन ने बताया कि विशेष न्यायालय में आरोपित दीपक खंडेलवाल और नकुल खंडेलवाल की ओर से यह कहते हुए कि उनका तस्करी के सोने से कोई संबंध नहीं है जमानत आवेदन प्रस्तुत किया था।
उनका यह भी कहना था कि वे करीब 20 साल से सराफा में व्यापार कर रहे हैं। उन्होंने कभी ऐसा कोई सोना नहीं खरीदा। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद दीपक और नकुल की ओर से प्रस्तुत जमानत आवेदन निरस्त कर दिए।