
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मध्य प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के भवनों पर अब सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग ने इस संबंध में उच्च शिक्षा विभाग को निर्देश जारी किए हैं।
योजना के तहत सरकारी महाविद्यालयों और अन्य शासकीय भवनों पर बिना किसी प्रारंभिक निवेश के सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए जाएंगे। इससे संस्थानों को बिजली वितरण कंपनी से मिलने वाली बिजली की तुलना में कम दर पर बिजली उपलब्ध हो सकेगी।
उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले शासकीय भवनों पर कुल 377 किलोवाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जाने हैं। मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम ने सभी जिलों में रेस्को पद्धति से संयंत्र स्थापित करने के लिए निविदा जारी कर वेंडर्स का चयन किया है। जिलेवार निर्धारित दरों और चयनित वेंडर्स की जानकारी भी संबंधित महाविद्यालयों को उपलब्ध कराई गई है। रेस्को मॉडल में सौर संयंत्र लगाने और उसके संचालन की जिम्मेदारी चयनित वेंडर्स की होगी।
चयनित वेंडर्स को आदेश मिलने के बाद 60 दिनों के भीतर संबंधित जिले में चिन्हित भवनों का सर्वे पूरा करना होगा। सर्वे के दौरान भवनों और छतों की उपयुक्तता समेत अन्य जरूरी बिंदुओं का परीक्षण किया जाएगा। सर्वे पूरा होने के बाद संबंधित आहरण एवं संवितरण अधिकारी (डीडीओ), सौर वेंडर्स और मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम के बीच त्रिपक्षीय बिजली खरीद समझौता किया जाएगा। इसके बाद सौर संयंत्र स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू होगी।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि सौर संयंत्र स्थापित करने से पहले संबंधित शासकीय महाविद्यालयों या विश्वविद्यालयों को अपने पुराने बिजली बिलों का पूरा भुगतान करना होगा। जिन संस्थाओं के बिजली बिल का भुगतान आहरण एवं संवितरण अधिकारी के माध्यम से नहीं होता, उनके लिए भुगतान सुरक्षा की व्यवस्था तैयार की जाएगी।
विभाग के आयुक्त प्रबल सिपाहा का कहना है कि सभी महाविद्यालयों व विश्वविद्यालयों को सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने के निर्देश दिए गए हैं। सौर संयंत्र स्थापित होने के बाद संस्थानों की बिजली लागत में कमी आने की उम्मीद है।
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