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MP के अस्पतालों में अब 'NAT' टेस्ट के बाद ही मिलेगा खून, सतना कांड से सबक लेकर सरकार का बड़ा फैसला

प्रदेश के अस्पतालों में अब रोगियों को न्यूक्लिक एसिड टेस्ट (NAT) मशीन से जांचा हुआ रक्त ही चढ़ाने के लिए ब्लड बैंक से दिया जाएगा। अब सभी संभागीय मुख्य...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sat, 21 Feb 2026 08:25:19 PM (IST)Updated Date: Sat, 21 Feb 2026 08:25:19 PM (IST)
MP के अस्पतालों में अब 'NAT' टेस्ट के बाद ही मिलेगा खून, सतना कांड से सबक लेकर सरकार का बड़ा फैसला
सतना कांड से सबक लेकर सरकार का बड़ा फैसला। (Image Source: AI-Generated)

HighLights

  1. एमपी के अब अस्पतालों में 'नैट' टेस्ट के बाद ही मिलेगा खून
  2. सतना की घटना से सबक लेकर सरकार का बड़ा फैसला
  3. सरकारी अस्पतालों में नई ब्लड बैंक पॉलिसी हुई लागू

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश के अस्पतालों में अब रोगियों को नैट (न्यूक्लिक एसिड टेस्ट) मशीन से जांचा हुआ रक्त ही चढ़ाने के लिए ब्लड बैंक से दिया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने यह व्यवस्था पिछले वर्ष दिसंबर में सतना के जिला अस्पताल में थैलेसीमिया पीड़ित चार बच्चों को एचआइवी संक्रमित रक्त चढ़ाए जाने की घटना से सबक लेते हुए शुरू की है। इंदौर-भोपाल के शासकीय मेडिकल कालेज में पहले से यह मशीन लगी है। अब सभी संभागीय मुख्यालयों में नैट मशीनें स्थापित करने की तैयारी है।

मशीन स्थापना और संचालन की कार्ययोजना

बता दें कि नैट मशीनें सरकारी मेडिकल कालेजों या ज्यादा रक्त संग्रहण वाले जिला अस्पतालों में लगाई जाएंगी, जहां से रक्त अन्य अस्पतालों के ब्लड बैंकों में पहुंचाया जाएगा। मशीनें सरकार नहीं बल्कि निजी कंपनी लगाएंगी, इसके बदले में उन्हें प्रति टेस्ट के मान से भुगतान किया जाएगा। यह भी सुनिश्चित किया जाएगा जिला अस्पताल में सभी ग्रुप का ब्लड उपलब्ध रहे, ताकि इमरजेंसी में भी नैट से बिना जांचे रक्त चढ़ाने की नौबत न आए।


रक्त में पांच बीमारियों की होगी सूक्ष्म जांच

रक्तदान से मिलने वाले ब्लड में एचआइवी, हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी, मलेरिया और वीडीआरएल (यौन संक्रामक रोग) सहित पांच प्रकार की बीमारियों की जांच की जाती है। एचआइवी जांच कहीं रैपिड किट से तो कहीं एचआइवी का एक्लिया टेस्ट से की जाती है। एक्लिया टेस्ट में बीमारी आसानी से पकड़ में आ जाती है। सतना में एक्लिया की किट खत्म होने के कारण कुछ टेस्ट रैपिड किट से किए गए। नैट का लाभ यह है कि इसमें एचआइवी का विंडो पीरियड घटकर 15 दिन रह जाता है।

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विंडो पीरियड का लाभ और भविष्य की चुनौतियां

विंडो पीरियड वह अवधि है, जिसमें बीमारी के विरुद्ध शरीर में एंटी बाडी नहीं बनने से वह पकड़ में नहीं आती। नई व्यवस्था में यह होगी चुनौती अधिकतर मामलों में स्वजन या परिचित द्वारा रक्तदान करने पर ही बदले में उसे ब्लड दिया जाता है। नैट से जांचा ब्लड ही रोगियों को उपलब्ध कराया जाए इसमें बड़ी चुनौती यह रहेगी कि ब्लड बैंक में सभी ब्लड ग्रुप का रक्त उपलब्ध रहे।