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अटल प्रोग्रेस-वे पर बड़ी खबर, किसानों के संघर्ष के आगे झुकी सरकार, अब पुराने रूट पर ही बनेगा कोटा से इटावा तक एक्सप्रेस-वे

मुरैना में सालों से अटके अटल प्रोग्रेस-वे का निर्माण अब पुराने रूट एलाइनमेंट पर कराया जाएगा। ऐसा होने से हाईवे को बनाने में सरकारी जमीन का उपयोग ज्याद...और पढ़ें

By Hariom GaurEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sat, 21 Feb 2026 07:51:58 PM (IST)Updated Date: Sat, 21 Feb 2026 07:51:58 PM (IST)
अटल प्रोग्रेस-वे पर बड़ी खबर, किसानों के संघर्ष के आगे झुकी सरकार, अब पुराने रूट पर ही बनेगा कोटा से इटावा तक एक्सप्रेस-वे
अटल प्रोग्रेस वे इस प्रकार बनेगा। - फोटो सोशल मीडिया।

HighLights

  1. अब पुराने रूट पर लौटेगा अटल प्रोग्रेस-वे
  2. सरकारी जमीन का होगा ज्यादा इस्तेमाल
  3. अब 73 गांवों की भूमि से गुजरेगा हाइवे

नईदुनिया प्रतिनिधि, मुरैना। सालों से अटके अटल प्रोग्रेस-वे (अटल प्रगति पथ) का निर्माण अब पुराने रूट एलाइनमेंट पर कराया जाएगा। ऐसा होने से हाईवे को बनाने में सरकारी जमीन का उपयोग ज्यादा व किसानों की उपजाऊ भूमि का उपयोग कम होगा। कहा जा सकता है कि 23 गांवों के 12 हजार से अधिक किसानों की 447 हेक्टेयर जमीन बच जाएगी। कोटा से इटावा के बीच 415 किमी लंबाई के प्रोग्रेस-वे को बनाने पर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण 11,690 करोड़ रुपये व्यय करेगा। प्रोग्रेस-वे के लिए एनएचएआई जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया नए सिरे से शुरू कर सकता है या फिर पुरानी 3-ए की कार्रवाई को अमल में ला सकता है।

सरकारी और निजी भूमि का समीकरण

अटल प्रोग्रेस-वे के लिए पुराना रूट एलाइनमेंट मान्य होगा या फिर नया सर्वे होगा, इस बात पर बीते तीन साल से बहस चल रही है। लेकिन प्रदेश सरकार ने अब इस पर स्थिति साफ कर दी है। पुराने रूट एलाइनमेंट पर अटल प्रोग्रेस-वे मुरैना जिले के 73 गांवों से होकर निकलेगा। इसमें 2,089 किसानों की 488.01 हेक्टेयर जमीन का ही उपयोग किया जाएगा, जबकि इसमें सरकारी जमीन 963.043 हेक्टेयर लगेगी। अब समझ लीजिए कि यदि अटल प्रोग्रेस-वे का निर्माण नए रूट एलाइनमेंट पर कराया जाता, तो उसमें 96 गांवों के 14,137 किसानों की 935.3 हेक्टेयर कृषि भूमि का अधिग्रहण किया जाता। नए रूट एलाइनमेंट पर प्रोग्रेस-वे बनाने पर उसमें सरकारी जमीन महज 29.4 हेक्टेयर ही लगती।


किसानों का विरोध और सरकार का निर्णय

23 गांवों के किसानों की 500 हेक्टेयर जमीन को बचाने के लिए सबलगढ़, जौरा, कैलारस, मुरैना, अंबाह व पोरसा के अन्नदाताओं ने 2023 में अनुविभागीय राजस्व अधिकारी कार्यालय से लेकर कलेक्ट्रेट व कमिश्नर कार्यालय पर कई बार विरोध प्रदर्शन किए। अगस्त 2023 में 100 किसानों का जत्था नए रूट एलाइनमेंट के विरोध में नई दिल्ली पहुंचा और तत्कालीन केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के बंगले से उनकी मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से बात कराई, कि अटल प्रोग्रेस-वे के नए रूट एलाइनमेंट पर किसान नाराज हैं। इसलिए नए रूट एलाइनमेंट के हिसाब से किसानों की बेशकीमती जमीनों के अधिग्रहण की प्रक्रिया रुकवाई जाए। चूंकि विधानसभा चुनाव निकट थे, इसलिए पूर्व मुख्यमंत्री चौहान ने आदेश जारी किए कि अटल प्रोग्रेस-वे का काम फिलहाल तत्काल प्रभाव से बंद किया जाए।

विधानसभा में घोषणा और एनएचएआई की सक्रियता

छह महीने पहले विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने दिमनी में आयोजित सभा के मंच से एलान किया था कि अटल प्रोग्रेस-वे का निर्माण तो होकर रहेगा, चाहे इसके लिए उनको चुनाव क्यों न हारना पड़े। विधानसभा अध्यक्ष तोमर के संकल्प पर कार्रवाई करते हुए मोहन यादव सरकार के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने 20 फरवरी को विधानसभा में घोषणा की कि अटल प्रोग्रेस-वे का निर्माण पुराने रूट एलाइनमेंट पर कराया जाएगा। सदन में अटल प्रोग्रेस-वे बनाने की घोषणा के साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण हरकत में आ गया है और इस प्रोजेक्ट की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) को रिफाइन करने की बात कही है। यहां बता दें कि 2023 में तो एनएचएआई ने अटल प्रोग्रेस-वे बनाने के लिए टेंडर तक लगा दिया था।

दिल्ली-मुंबई हाईवे और बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे का जुड़ाव

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के सूत्रों का कहना है कि 415 किमी लंबाई का अटल प्रोग्रेस-वे दिल्ली-मुंबई हाईवे से बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे को जोड़ेगा। इसे तैयार करने पर 12,690 करोड़ रुपये की लागत आएगी। कोटा से शुरू होकर इटावा तक इस प्रोग्रेस-वे का निर्माण कराया जाएगा। मुरैना जिले से निकलने वाले अटल प्रोग्रेस-वे के पुराने रूट एलाइनमेंट में किसानों की 488 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण होगा। अटल प्रोग्रेस-वे जिले के 73 गांवों की जमीन से होकर निकलेगा और इसके लिए जिले के 2,089 किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा।

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मुआवजे की मांग और आगामी चुनौतियां

2023 में चली जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया के तहत राजस्व कार्यालयों में राजस्व संहिता की धारा 3-ए की कार्रवाई की जा चुकी थी। किसानों के खेतों के अलावा उनकी कृषि भूमि पर बने कुएं, तिवरिया, पेड़ आदि का मूल्यांकन भी उसके भुगतान के लिए किया जा चुका था। अटल प्रोग्रेस-वे बेशक पुराने रूट एलाइनमेंट पर बनाया जाएगा, लेकिन जिन किसानों की जमीन का अधिग्रहण इस प्रोजेक्ट के लिए होगा, वह अपनी जमीन का चार गुना मुआवजा एनएचएआई से मांगेंगे। यहां बता दें कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अटल प्रोग्रेस-वे के लिए जमीन अधिग्रहण के मामले में दोगुना मुआवजा देने की घोषणा की थी, लेकिन किसान अब फिर से चार गुना मुआवजा देने की मांग करेंगे।