
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मध्य प्रदेश सरकार भवन निर्माण एवं अन्य सन्निर्माण कार्यों में लगे श्रमिकों के होनहार बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए एक नई पहल करने जा रही है। राज्य शासन द्वारा 'भवन एवं अन्य सन्निर्माण श्रमिक श्री मेधा छात्र उन्नयन योजना' की रूपरेखा तैयार की गई है।
इस योजना के तहत चयनित मेधावी विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा तथा व्यावसायिक व प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए प्रतिमाह ₹7500 की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इस छात्रवृत्ति की मदद से विद्यार्थी अपनी कोचिंग फीस, शैक्षणिक सामग्री, हॉस्टल का खर्च तथा NEET, JEE और CLAT जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी आसानी से कर सकेंगे।
योजना को शुरुआती दौर में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जा रहा है, जिसके तहत कुल 600 प्रतिभाशाली छात्रों का चयन किया जाएगा। इनमें से 500 विद्यार्थियों का चयन 'भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल' और 100 विद्यार्थियों का चयन 'श्रमिक कल्याण बोर्ड' के जरिए होगा।
छात्रों का चयन मध्य प्रदेश बोर्ड (MP Board) और सीबीएसई (CBSE) की 10वीं की संयुक्त मेरिट सूची के आधार पर किया जाएगा। योजना में बालिकाओं को प्रोत्साहन देने के लिए 20 प्रतिशत सीटें आरक्षित की गई हैं। इस चरण की सफलता के बाद भविष्य में सीटों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।
इस योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदक का नियमित छात्र होना अनिवार्य है। इसके साथ ही विद्यार्थी के माता-पिता का संबंधित श्रमिक मंडल में कम से कम 90 दिनों के कार्य अनुभव के साथ वैध पंजीकरण होना आवश्यक है। शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो छात्र ने 10वीं कक्षा में कम से कम 80% अंक हासिल किए हों। छात्रवृत्ति की राशि आगे भी जारी रखने के लिए लाभार्थी को 12वीं की परीक्षा में न्यूनतम 75% अंक बनाए रखना अनिवार्य होगा।
इस योजना का मुख्य ध्येय आर्थिक रूप से कमजोर श्रमिक परिवारों के प्रतिभाशाली बच्चों को वित्तीय अभाव के कारण शिक्षा से वंचित होने से बचाना है। ₹7,500 मासिक की यह सहायता राशि विद्यार्थियों को वित्तीय तनाव से मुक्त कर इंजीनियरिंग, मेडिकल और लॉ जैसे क्षेत्रों में करियर बनाने का हौसला देगी।
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