
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मध्य प्रदेश नर्सेज रजिस्ट्रेशन काउंसिल की ऑनलाइन पंजीयन व्यवस्था गधे को भी नर्स बना दे रही है। यह मजाक नहीं सचमुच हो रहा है। गधे की एक तस्वीर, कुछ ब्यौरे और दो असंबद्ध दस्तावेजों की स्कैन कॉपी के आधार पर काउंसिल ने "डंकी एमपीएनआरसी" के नाम पर डिजिटल पंजीयन प्रमाणपत्र जारी कर दिया। काउंसिल अब मामले की जांच और एफआइआर की बात कह रहा है।
दरअसल, एनएसयूआइ के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने नर्सेज काउंसिल के आनलाइन सिस्टम से डंकी एमपीएनआरसी पिता डंकी फादर के नाम से पंजीयन के लिए आवेदन किया। आवेदन में गधे की तस्वीर लगाई गई, धर्म के खाते में अन्य, जाति में जानवर और पते के खाने में लिखा गया-जहां पर जगह मिल जाए। शैक्षणिक दस्तावेजों के स्थान पर ऐसे कागजात अपलोड किए गए, जिनसे वास्तविक शैक्षणिक योग्यता प्रमाणित नहीं होती।
पंजीयन के लिए निर्धारित 2050 रुपये का शुल्क भुगतान करने के बाद डिजिटल पंजीयन प्रमाणपत्र जारी हो गया। जिसमें डंकी एमपीएनआरसी को भोपाल नर्सिंग कॉलेज से बीएससी नर्सिंग पासआउट प्रमाणित कर नर्स-मिडवाइफ के रूप में पंजीकृत बता दिया गया। यह पंजीयन सितंबर 2031 तक के लिए वैध है।
रवि परमार ने बताया कि उन्होंने यह परीक्षण परिषद की आनलाइन पंजीयन प्रक्रिया में दस्तावेज सत्यापन और सिस्टम की कार्यप्रणाली की गड़बड़ी सामने लाने के लिए किया। उन्होंने कहा कि जब गधे का रजिस्ट्रेशन हो सकता है तो असली दस्तावेजों का सत्यापन कैसे हो रहा है? उनका कहना है कि यदि आधिकारिक पोर्टल पर इस तरह आवेदन स्वीकार कर प्रमाणपत्र जारी हो सकता है तो यह केवल तकनीकी खामी का मामला नहीं है, बल्कि पंजीयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल है। यदि कोई व्यक्ति बिना वास्तविक नर्सिंग योग्यता के पंजीयन प्राप्त कर लेता है और बाद में इसी प्रमाणपत्र के आधार पर अस्पताल, नर्सिंग होम या अन्य स्वास्थ्य संस्थान में नौकरी हासिल करता है तो मरीजों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
पंजीयन की पुरानी प्रक्रिया में आवेदन के साथ 10वीं, 12वीं परीक्षा का अंकपत्र, बीएससी नर्सिंग कोर्स कंप्लीशन प्रमाणपत्र, प्रोविजनल डिग्री या डिप्लोमा के सभी सत्र की मार्कशीट का कालेज के प्राचार्य द्वारा शील साइन के साथ सत्यापन मांगा जाता था। काउंसिल में इनकी जांच होती, उसके बाद डिजिटल साइन के साथ दस्तावेज जारी होते। अब पंजीयन के लिए केवल ट्रेनिंग कंप्लीशन सर्टिफिकेट और डिग्री या डिप्लोमा सर्टिफिकेट की स्कैन कापी मांगी जा रही है। वह दस्तावेज भी संबद्ध है या कोई और दस्तावेज लगा दिया गया है, यह जांचने की कोई व्यवस्था सिस्टम में नहीं है।
इस खुलासे के बाद काउंसिल ने अपने पोर्टल पर पंजीयन का लिंक हटा लिया है। यानी कुछ दिनों के लिए आनलाइन पंजीयन की प्रक्रिया रोक दी गई है। काउंसिल का कहना है कि पंजीयन प्रक्रिया में आवश्यक सेफगार्ड लगाने के बाद जल्दी ही इसे फिर से शुरू किया जाएगा।
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यह फ्रॉड किया गया है। आइटी सेल से कहा गया है कि वेबसाइट में और सेफगार्ड लगाए जाएं। अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ एफआइआर की जा रही है। वेबसाइट विद्यार्थियों के लिए बनाई गई है, लेकिन कुछ लोग इसका गलत तरीके से इस्तेमाल कर रहे हैं। - डॉ. बीनू कुशवाहा, अध्यक्ष, मप्र नर्सेज रजिस्ट्रेशन काउंसिल