
सौरभ सोनी, नईदुनिया, भोपाल। मध्य प्रदेश में सरकार अब जिला आधारित विकास मॉडल पर काम करेगी। इसके लिए ओडीओपी (एक जिला एक उत्पाद) व भौगोलिक संकेतक (जियोग्राफिकल इंडिकेशन-जीआई) नीति लाने की तैयारी की जा रही है। राज्य सरकार इस नीति को अंतिम रूप दे रही है।
ग्लोबल इन्वेस्टर समिट (जीआईएस-2027) से पहले यह नीति प्रदेश में लागू कर दी जाएगी, ताकि मध्य प्रदेश में इस क्षेत्र में अधिक से अधिक निवेश आ सके।
इस नीति के अंतर्गत एक जिले में एक से अधिक उत्पाद चुने जा सकेंगे और वर्तमान ओडीओपी व्यवस्था का कई गुना विस्तार किए जाने की तैयारी है। 55 जिलों में कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प, हथकरघा, जनजातीय उत्पाद, स्थानीय व्यंजन (एक जिला एक व्यंजन) यानी ओडीओसी, प्राकृतिक संसाधनों तथा सेवाओं सहित सैकड़ों जिला-विशिष्ट उत्पादों एवं आर्थिक गतिविधियों को जिला ओडीओपी पोर्टफोलियो के अंतर्गत विकसित किया जाएगा।
प्रस्तावित नीति केवल उत्पाद चयन तक सीमित नहीं होगी, बल्कि जीआई, ओडीओपी पोर्टफोलियो, ओडीओसी, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग, निवेश, पर्यटन, डिजिटल कॉमर्स और निर्यात को एकीकृत करने वाला व्यापक आर्थिक मॉडल प्रस्तुत करेगी। इन पहल के माध्यम से जिलों के प्रदर्शन का मूल्यांकन, श्रेष्ठ जिलों का सम्मान तथा स्थानीय उत्पादों की राष्ट्रीय एवं वैश्विक ब्रांडिंग को नई गति मिलेगी।
हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की दुबई यात्रा के दौरान आयोजित एआईएम कांग्रेस में मध्य प्रदेश के ओडीओपी उत्पादों की विशेष प्रदर्शनी को अंतरराष्ट्रीय निवेशकों, खरीदारों तथा विदेशी प्रतिनिधियों से व्यापक सराहना मिली। इसके बाद प्रदेश सरकार स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने की रणनीति को और तेज करने की तैयारी में है।
राज्य सरकार का दावा है कि यदि यह नीति वर्तमान स्वरूप में लागू होती है तो मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य बन सकता है जहां जीआई, ओडीओपी पोर्टफोलियो और ओडीओसी को एकीकृत कर जिला आधारित आर्थिक विकास का समग्र मॉडल विकसित किया जाएगा।
इससे किसानों, कारीगरों, बुनकरों, स्वयं सहायता समूहों, एफपीओ, स्टार्टअप तथा एमएसएमई को एक साझा संस्थागत मंच मिलने के साथ स्थानीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता, निवेश आकर्षण और निर्यात क्षमता में वृद्धि होगी।
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