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राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश में साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल किए जा रहे म्यूल (किराये के ऐसे खाते जिनमें ठगी की राशि आई) बैंक खातों के विरुद्ध 'आपरेशन मैट्रिक्स-2' शुरू किया गया है। यह विशेष अभियान 28 नवंबर तक चलाया जाएगा। अभियान के तहत प्रथम लेयर, यानी जिस खाते में सबसे पहले ठगी की रकम ट्रांसफर हुई, ऐसे 4,086 खातों को चिह्नित किया गया है।
पहली बार ऐसे खातों को विशेष रूप से चिह्नित किया गया है, जिनमें पीड़ित के साथ-साथ म्यूल खाताधारक भी मध्य प्रदेश के ही निवासी हैं। इससे पुलिस को खाताधारकों तक पहुंचने, उनकी गिरफ्तारी करने और उन्हें कोर्ट में पेश करने में आसानी होगी।
इससे पहले चलाए गए 'ऑपरेशन मैट्रिक्स-1' में दूसरे राज्यों के खाताधारक भी शामिल थे, जिसके कारण उनकी गिरफ्तारी और न्यायिक प्रक्रिया में काफी कठिनाई आई थी।
अभियान के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि खाता पहले से खुला हुआ था या ठगों के कहने पर नया खुलवाया गया था। इसके साथ ही खाता खुलवाने में इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों की वैधता, कमीशन पर खाते उपलब्ध कराने वाले बिचौलियों और ठगी की रकम आगे किन खातों में ट्रांसफर की गई, इसकी कड़ियों को जोड़ा जाएगा। खातों से जुड़े मोबाइल नंबर, केवाईसी दस्तावेज और बैंक लेनदेन की भी गहन जांच की जाएगी। फर्जी दस्तावेजों से सिम जारी कराने के मामले भी इस अभियान के दायरे में आएंगे।
एसपी साइबर प्रणय नागवंशी ने बताया कि आपरेशन मैट्रिक्स-2 प्रारंभ हो गया है। इसमें चिह्नित खातों की जांच कर उनके धारकों और साइबर ठगी के नेटवर्क से जुड़े सभी लोगों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जनवरी-फरवरी में चलाए गए आपरेशन मैट्रिक्स-1 के तहत प्रदेश के 12 जिलों में 26 एफआईआर दर्ज की गई थीं और 46 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया था। उस दौरान पहली लेयर के करीब 3,330 म्यूल खातों की जांच की गई थी। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 50 मोबाइल फोन, 80 सिम कार्ड और 91 एटीएम कार्ड सहित अन्य आपत्तिजनक सामग्री जब्त की थी। साथ ही आरोपितों के खातों में जमा 13 लाख रुपये फ्रीज कराए गए थे, जिससे तीन अंतरराज्यीय और एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश हुआ था।
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