• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • गणेशोत्‍सव 2026
  • हनुमान अंश
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • मानसून
  • वास्‍तु शास्‍त्र
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • भोपाल

MP में 1 लाख पुलिसकर्मियों की खुफिया जानकारी पर नजर रखने के लिए सिर्फ 15 अफसर, CBI जैसे विजिलेंस की मांग

पुलिसिंग के जानकारों का भी कहना है कि जिस तरह से अपराध बढ़ा और अपराध का तरीका बदला है, उसी दृष्टि से विजिलेंस सिस्टम को मजबूत करने की आवश्यकता है।

By Digital DeskEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Tue, 25 Aug 2026 07:18:54 PM (IST)Updated Date: Tue, 25 Aug 2026 07:18:54 PM (IST)
MP में 1 लाख पुलिसकर्मियों की खुफिया जानकारी पर नजर रखने के लिए सिर्फ 15 अफसर, CBI जैसे विजिलेंस की मांग
MP में 1 लाख पुलिसकर्मियों की खुफिया जानकारी पर नजर रखने के लिए सिर्फ 15 अफसर

HighLights

  1. विजिलेंस सेल में कुल 39 स्वीकृत पदों में से 24 पद खाली हैं
  2. दिसंबर 2025 तक प्रदेश में 329 पुलिसकर्मियों पर मामले दर्ज
  3. पूर्व स्पेशल DG ने पुलिस में CBI जैसा सिस्टम बनाने की मांग की

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। कटनी की सीएसपी नेहा पच्चीसिया के कथित भ्रष्टाचार का मामला हो या फिर हवाला के दो करोड़ 96 लाख रुपये की बंदरबाट की आरोपित डीएसपी पूजा पांडे या फिर पुलिस के अन्य अधिकारियों-कर्मचारियों का मामला, पुलिस के विजिलेंस सिस्टम से पुलिसकर्मियों द्वारा की जा रही गड़बड़ी की जानकारी नहीं मिल पा रही है। इसकी बड़ी वजह पुलिस के विजिलेंस सेल में पर्याप्त पुलिसकर्मियों का न होना भी है। पुलिस विजिलेंस में कुल 39 का बल स्वीकृत है, जिसमें कार्यरत मात्र 15 हैं। ऐसे में एक जिले में औसतन एक भी नहीं है।

पुलिसिंग के जानकारों का भी कहना है कि जिस तरह से अपराध बढ़ा और अपराध का तरीका बदला है, उसी दृष्टि से विजिलेंस सिस्टम को मजबूत करने की आवश्यकता है। पुलिसकर्मियों द्वारा भ्रष्टाचार के कई बड़े मामले पिछले दो वर्षों में सामने आ चुके हैं। भोपाल में वर्ष 2025 में ऐशबाग थाने के चार पुलिसकर्मियों के विरुद्ध पांच लाख रुपये मांगने के आरोप में एफआईआर पंजीबद्ध की गई थी। इंदौर में भी मामले सामने आए हैं।


लेन-देन का ऑडियो-वीडियो सोशल मीडिया में बहुप्रसारित होने के बाद पुलिस सक्रिय हो रही है या फिर पीड़ित की शिकायत के बाद। पुलिस का विजिलेंस सिस्टम न के बराबर है। एक स्पेशल डीजी के अधीन इसमें एक-एक डीआईजी और एआईजी सहित अन्य स्टाफ है। इसमें 50 प्रतिशत महिलाएं हैं। उधर, जिलों में पुलिस अधीक्षकों का तंत्र भी फेल है। पिछले कुछ वर्षों में पुलिसकर्मियों के विरुद्ध दर्ज भ्रष्टाचार के मामलों से यह भी साबित होता है, जिलों में पुलिस अधीक्षकों को भी अपने निचले स्टाफ की कारगुजारियों की जानकारी नहीं रहती है।

प्रदेश में 300 से अधिक पुलिसकर्मियों के विरुद्ध दर्ज हैं अपराध के मामले

दिसंबर 2025 की स्थिति में प्रदेश में पुलिस के अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध अपराध के 329 प्रकरण पंजीबद्ध थे। इनमें अधिकतर मारपीट और भ्रष्टाचार से जुड़े मामले थे। 259 मामलों में पहले ही आरोप पत्र दाखिल किए जा चुके हैं, जबकि 61 में जांच लंबित थी। इसमें सर्वाधिक 48 अपराध भोपाल में दर्ज हैं, दूसरे नंबर पर ग्वालियर में 27 मामले पंजीबद्ध हैं।

यह भी पढ़ें- उत्तर प्रदेश से मजदूरी के लिए आया युवक, ज्वॉइनिंग के दिन ही बूम लिफ्ट ने कुचला, बुझ गया घर का इकलौता चिराग

पुलिस में विजिलेंस को बहुत अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है। सीबीआई जैसा सिस्टम होना चाहिए। सीबीआई खुद अपने लोगों पर नजर रखती है, पकड़ती है। यही कारण है वहां कोई भ्रष्टाचार में शामिल होने से डरता है। मप्र पुलिस में जिस तरह से भ्रष्टाचार के मामले बढ़े हैं, गृह विभाग और सरकार को बहुत अधिक ध्यान देने की जरूरत है। - शैलेश सिंह, सेवानिवृत्त स्पेशल डीजी, पुलिस