
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। राज्यसभा सदस्य रहे डॉ. एल. मुरुगन के इस्तीफे से रिक्त हुई सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए प्रत्याशी का फैसला भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व करेगा। प्रदेश नेतृत्व नामों का पैनल दिल्ली भेजेगा, लेकिन अंतिम मुहर प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री की मौजूदगी में होने वाली संसदीय बोर्ड की बैठक में लगेगी। उप चुनाव में निर्वाचित सदस्य को दो अप्रैल 2030 तक का कार्यकाल मिलेगा।
उल्लेखनीय है कि मुरुगन ने तमिलनाडु से विधानसभा चुनाव भी लड़ा था, लेकिन पराजित हो गए थे। उधर, कांग्रेस के पास चुनाव जीतने के लिए आवश्यक विधायकों की संख्या नहीं है, मगर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी का कहना है कि वह वरिष्ठ नेताओं से परामर्श करके उम्मीदवार को लेकर निर्णय करेंगे।
कुछ दिन पहले मध्य प्रदेश से राज्यसभा सदस्य और केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री रहे डॉ. एल. मुरुगन ने मंत्री पद और राज्यसभा की सदस्यता दोनों से इस्तीफा दे दिया था। भाजपा ने उन्हें तमिलनाडु के मूल निवासी होने के बावजूद मप्र से दो बार राज्यसभा में भेजा था। पहली बार सितंबर 2021 में हुए राज्यसभा उपचुनाव के दौरान मप्र से उन्हें निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया था।
इसके बाद दूसरी बार अप्रैल 2024 में भाजपा ने फिर से उन पर भरोसा जताया और मप्र के कोटे से ही दोबारा राज्यसभा में भेजा था। राज्यसभा सदस्य का उनका यह कार्यकाल साल 2030 में समाप्त होने वाला था। उनका लगभग साढ़े तीन वर्ष का कार्यकाल बाकी था।
भाजपा सूत्रों के अनुसार दीपावली या उसके आसपास मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का एक बड़ा फेरबदल संभावित माना जा रहा है। इस संभावित विस्तार में यदि किसी ऐसे बड़े राष्ट्रीय चेहरे या गैर-सांसद नेता को कैबिनेट मंत्री या राज्य मंत्री बनाया जाता है, जिसे संसद में लाना जरूरी हो, तो उसके लिए मध्य प्रदेश की यह सीट सबसे सुरक्षित और पक्की सीट मानी जा रही है, क्योंकि यहां भाजपा के पास एकतरफा बहुमत है।
यह भी पढ़ें- दीवाली से पहले किसानों के लिए खुशखबरी, इस दिन खाते में आएगी पीएम किसान की 24वीं किस्त, तुरंत कराएं e-KYC
मुरुगन से पहले भी भाजपा में राष्ट्रीय समीकरणों यानी राज्यों को साधने के लिए मध्य प्रदेश की सीटों का उपयोग बाहरी नेताओं के लिए होता रहा है। पहले भी प्रकाश जावड़ेकर (महाराष्ट्र), एम. वेंकैया नायडू (आंध्र प्रदेश) जैसे नेताओं को अलग-अलग समय पर यहां से प्रतिनिधित्व दिया गया है। इससे यह संभावना प्रबल है कि दक्षिण भारत से ही किसी नेता को मप्र से राज्यसभा भेजा जा सकता है।
मप्र में कुल 11 राज्यसभा सीटें हैं, जिनमें से दो कांग्रेस और आठ भाजपा के पास हैं। इसी वर्ष जून में हुए उप चुनाव में भाजपा के तरुण चुग, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट राज्यसभा चुनाव में निर्विरोध निर्वाचित हुए थे।