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MP में सूखे का साया, 11 जिले सूखे की कगार पर; आलीराजपुर में 52% कम बारिश, पांढुर्णा में किसानों ने रोका CM का काफिला

मध्य प्रदेश में कम बारिश से 11 जिले सूखे की कगार पर पहुंच गए हैं। खरीफ फसलों को नुकसान के साथ रबी सिंचाई और पेयजल संकट की आशंका बढ़ी है।

By Digital DeskEdited By: Anurag Mishra
Publish Date: Tue, 06 Oct 2026 12:20:43 PM (IST)Updated Date: Tue, 06 Oct 2026 12:20:43 PM (IST)
MP में सूखे का साया, 11 जिले सूखे की कगार पर; आलीराजपुर में 52% कम बारिश, पांढुर्णा में किसानों ने रोका CM का काफिला
MP में सूखे का साया। (एआई जनरेटेड)

HighLights

  1. कम बारिश से मध्य प्रदेश के 11 जिले सूखे की कगार।
  2. आलीराजपुर में सामान्य से 52 प्रतिशत कम बारिश दर्ज हुई।
  3. सोयाबीन, मक्का और मूंग जैसी फसलों को भारी नुकसान।

डिजिटल डेस्क। मध्य प्रदेश में इस बार मानसून की बेरुखी ने किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। कम बारिश के कारण प्रदेश के 11 जिले सूखे की कगार पर पहुंच गए हैं, जिनमें मालवा के प्रमुख शहर इंदौर और उज्जैन भी शामिल हैं। सबसे खराब हालात आलीराजपुर के हैं, जहां सामान्य से 52 फीसदी कम पानी बरसा है। जल संकट के चलते न केवल खरीफ की फसलें बर्बाद हो रही हैं, बल्कि आगामी रबी सीजन की सिंचाई और पेयजल व्यवस्था के लिए भी खतरे की घंटी बज चुकी है।

पांढुर्णा में किसानों ने रोका सीएम का काफिला

  • आंकड़ों के मुताबिक, 11 में से नौ जिले (इंदौर, उज्जैन, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, झाबुआ, धार और आलीराजपुर) सीधे तौर पर सूखाग्रस्त होने के पैमाने पर आ रहे हैं। वहीं, शाजापुर और पांढुर्णा में सिर्फ 3 प्रतिशत का ही अंतर है। हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 4 अक्टूबर को पांढुर्णा पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का काफिला किसानों ने रोक लिया था।

  • सूखी फसलें हाथ में लिए किसानों ने कृषि कर्ज माफी और जिले को तुरंत सूखाग्रस्त घोषित करने की गुहार लगाई। स्थिति को समझते हुए सीएम ने खुद गाड़ी से उतरकर उनकी समस्याएं सुनीं। वर्तमान में सोयाबीन, मक्का और मूंग जैसी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है।
  • 2015 के बाद फिर मंडराया अकाल का साया

    • मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार, किसी भी जिले में सामान्य से 26 प्रतिशत कम बारिश होने पर उसे सूखाग्रस्त माना जाता है। इस बार मालवा-निमाड़ के साथ-साथ नर्मदापुरम संभाग भी प्यासा रह गया। प्रदेश में 2015 के बाद अब 2026 में ऐसे गंभीर हालात बने हैं।

  • हालांकि 2017 और 2018 में भी बारिश कम हुई थी, लेकिन इस बार छिटपुट बारिश और ओवरऑल 4% की कमी ने दोहरी मार मारी है। इसके उलट, पिछले साल (2025) 51 जिलों में जमकर बदरा बरसे थे और 10 साल में तीसरी बार सबसे ज्यादा पानी गिरा था।
  • मौसम विभाग का अनुमान रहा सटीक

    इस साल मौसम विभाग की भविष्यवाणी बिल्कुल सटीक साबित हुई। विभाग ने पहले ही प्रदेश में 90 से 95 प्रतिशत बारिश होने की संभावना जताई थी। इस बार सिर्फ 25 जिलों में सामान्य से अधिक पानी गिरा है, जबकि 30 जिलों में बारिश का आंकड़ा औसत से काफी नीचे रहा। सबसे कम बारिश वाले जिलों की सूची में शाजापुर 11वें स्थान पर है।

    क्या है सूखा घोषित करने की प्रक्रिया?

    • प्रशासन केवल कम बारिश के आधार पर किसी इलाके को सूखाग्रस्त घोषित नहीं करता। इसके लिए फसल की मौजूदा स्थिति, बोवनी का रकबा, मिट्टी की नमी, भूजल स्तर और जलाशयों में पानी की उपलब्धता का बारीक आकलन किया जाता है।
    • जल्द ही सिंचाई और पेयजल के हालात को देखते हुए सरकारी टीमें मैदान में उतरेंगी। जिलों की गिरदावरी रिपोर्ट कलेक्टरों के माध्यम से राजस्व व आपदा प्रबंधन विभाग को भेजी जाएगी। शासन स्तर पर इन रिपोर्ट्स की गहन समीक्षा के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। नियमों के मुताबिक, खरीफ सीजन के लिए सूखा घोषित करने की समय सीमा 31 अक्टूबर तय है।

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