
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मध्य प्रदेश में आधुनिक शहरीकरण की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राज्य सरकार ने 15 नए सैटेलाइट टाउन स्थापित करने का निर्णय लिया है। इंदौर में आयोजित 'अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव' के दौरान इस महत्वाकांक्षी परियोजना की रूपरेखा सामने रखी गई।
इन नए उप-नगरों के विकास के साथ ही प्रदेश भर में सुगम आवागमन सुनिश्चित करने के लिए सड़कों के व्यापक नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा, जिससे प्रमुख महानगरों पर जनसंख्या और बुनियादी ढांचे का दबाव कम हो सके।
इंदौर के कॉन्क्लेव में प्रदेश के ढांचागत विकास को गति देने के लिए 2013 करोड़ रुपये के समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस आयोजन में 'इंदौर आर्थिक क्षेत्र विकास रिपोर्ट-2047' का भी अनावरण हुआ। इस विजन डॉक्यूमेंट में आगामी दशकों के दौरान राज्य में उभरने वाले आर्थिक अवसरों, निवेश और सुनियोजित शहरी विस्तार की दीर्घकालिक रणनीति तैयार की गई है। नए सैटेलाइट टाउन इसी दीर्घकालिक योजना के महत्वपूर्ण आधार बनेंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में भी शहरी और ग्रामीण विकास से जुड़े इन अहम प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई। एमएसएमई मंत्री चैतन्य कश्यप ने कैबिनेट ब्रीफिंग में बताया कि राज्य में चल रही 23 हजार 228 करोड़ रुपये की विभिन्न जनहितकारी योजनाओं को निरंतर जारी रखने की मंजूरी दी गई है। सरकार का मुख्य ध्यान नए नियोजित शहरों के निर्माण और आवागमन के आधुनिक साधन जुटाने पर केंद्रित है।
शहरी विस्तार के साथ-साथ ग्रामीण अंचलों में नागरिकों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मुख्यमंत्री स्वामित्व योजना के तहत संपत्ति पंजीयन प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। इस योजना में संपत्ति की रजिस्ट्री का पूरा वित्तीय भार मध्य प्रदेश सरकार वहन कर रही है। अब तक 15 लाख संपत्तियों का पंजीयन संपन्न हो चुका है, जिसे 15 नवंबर तक 20 लाख और इस वर्ष के अंत तक 50 लाख तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह दस्तावेज ग्रामीणों को स्वामित्व अधिकार देने के साथ-साथ बैंकों से ऋण प्राप्ति को भी सुगम बनाएगा।
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