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देश में पहली बार... मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में दो हिंदू चेहरों की एंट्री, कौन हैं इंदौर के मनोज और गुना के अनिमेश?

मध्य प्रदेश ने देश की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में एक नया इतिहास रच दिया है। केंद्र सरकार के नए वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 के प्रावधानों को जमीन पर...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Mon, 06 Jul 2026 04:50:21 PM (IST)Updated Date: Mon, 06 Jul 2026 04:50:21 PM (IST)
देश में पहली बार... मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में दो हिंदू चेहरों की एंट्री, कौन हैं इंदौर के मनोज और गुना के अनिमेश?
कौन है इंदौर के मनोज और गुना के अनिमेश?

HighLights

  1. वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 लागू करने वाला एमपी बना पहला राज्य
  2. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने वक्फ बोर्ड के पुनर्गठन को दी अपनी मंजूरी
  3. इतिहास में पहली बार बोर्ड में दो हिंदू सदस्यों को किया गया शामिल

MP Waqf Board Reorganization: मध्य प्रदेश ने देश की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में एक नया इतिहास रच दिया है। केंद्र सरकार के नए वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 (Waqf Amendment Act 2025) के प्रावधानों को पूरी तरह जमीन पर उतारने वाला मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव की मंजूरी के बाद मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन कर दिया गया है, जिसमें सबसे बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव यह है कि पहली बार दो हिंदू सदस्यों को बोर्ड में जगह दी गई है। इस नए फैसले के तहत इंदौर के सनवर पटेल को एक बार फिर एमपी वक्फ बोर्ड का अध्यक्ष चुना गया है, जिनके नेतृत्व में बनी 10 सदस्यीय नई टीम में दो हिंदू चेहरों को शामिल किया गया है।


जानिए कौन हैं वक्फ बोर्ड में शामिल हुए दो हिंदू सदस्य?

बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की अनिवार्य नियुक्ति के नियम के तहत सरकार ने दो जमीनी सामाजिक कार्यकर्ताओं पर भरोसा जताया है, जिनके नामों को लेकर इस वक्त प्रदेश में काफी चर्चा है:

मनोज मालपानी (इंदौर): इंदौर के रहने वाले मनोज मालपानी लंबे समय से सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। स्थानीय स्तर पर उनकी पहचान एक कर्मठ सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में है। कई सामाजिक संगठनों और जनसेवा के कार्यक्रमों में उनके लंबे अनुभव को देखते हुए ही सरकार ने उन्हें यह बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है।

अनिमेश भार्गव (गुना): गुना जिले के राघौगढ़ के रहने वाले अनिमेश भार्गव भी सार्वजनिक और जनहित के मुद्दों पर लगातार सक्रिय रहे हैं। स्थानीय लोगों के बीच अपनी मजबूत पकड़ और सामाजिक कार्यों के अनुभव की बदौलत उन्हें वक्फ बोर्ड की इस नई टीम में शामिल किया गया है। सरकार का मानना है कि उनका यह अनुभव बोर्ड के कामकाज को बेहतर बनाने में मददगार होगा।

पुराने कानून से कितना अलग है नया प्रावधान?

इससे पहले तक देश में 'वक्फ अधिनियम 1995' लागू था, जिसके नियमों के मुताबिक बोर्ड के सभी सदस्यों का मुस्लिम होना अनिवार्य था। सरकार जिन सदस्यों को नामित भी करती थी, वे भी मुस्लिम समुदाय से ही होते थे। लेकिन वक्फ अधिनियम 2025 ने इस पूरी तस्वीर को बदल दिया है। नए कानून के मुताबिक, अब हर राज्य के वक्फ बोर्ड में कम से कम दो गैर-मुस्लिम सदस्यों का होना अनिवार्य कर दिया गया है।

एक तरफ पारदर्शिता का दावा, दूसरी तरफ जमकर विरोध

वक्फ बोर्ड एक वैधानिक संस्था है जो वक्फ संपत्तियों के संरक्षण, प्रबंधन और उससे होने वाली आय को समाज के हित में लगाने का काम करती है। सरकार का दावा है कि इन नई नियुक्तियों से बोर्ड के कामकाज में पारदर्शिता और मजबूती आएगी। हालांकि, इस फैसले को लेकर प्रदेश में विरोध भी शुरू हो गया है।

ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी के पदाधिकारियों ने भोपाल के बुधवारा चौराहे पर जोरदार प्रदर्शन करते हुए इस फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है कि इस फैसले से मुस्लिम समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। विरोध के सुरों के बीच, मध्य प्रदेश इस कानून को लागू कर देश में मिसाल पेश कर चुका है।

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