
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। देरी से आया मानसून इस बार लंबा टिक सकता है। मौसम विभाग का अनुमान है कि अभी जो परिस्थितियां हैं उसके मुताबिक मानसून की वापसी पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से 19 सितंबर से शुरू हो सकती है। पिछले साल यह वापसी 14 सितंबर से शुरू हुई थी।
करीब 10 दिन बाद मध्य प्रदेश में वापसी का यह सिस्टम प्रभावी हुआ। 10 अक्टूबर तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों से मानसून की विदाई हो चुकी थी। इस मान से अगर वापसी हुई तो इस बार प्रदेश से मानसून 12 से 15 अक्टूबर के बीच विदा होगा। यानी बरसात की संभावना बनी रहेगी।
इस बीच दो स्थानीय मौसमी तंत्र भारी वर्षा का संयोग बना रहे हैं। उधर मंगलवार को प्रदेश के ग्वालियर और जबलपुर में 5.0 मिलीमीटर, नरसिंहपुर में 2.0 मिलीमीटर, छतरपुर जिले के खजुराहो और दतिया में 1.0 मिलीमीटर वर्षा हुई। प्रदेश का आसमान फिलहाल साफ है इसके चलते दिन और रात के तापमान में इजाफा होना शुरू हो गया है। प्रदेश के सिवनी, खंडवा और छिंदवाड़ा को छोड़कर बाकी जिलों का दिन का तापमान 30 डिग्री से ऊपर रिकार्ड किया गया।
अब तक औसत से छह प्रतिशत कम वर्षा प्रदेश में एक जून से 15 सितंबर तक दीर्घावधि औसत से छह प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में औसत से दो प्रतिशत और पश्चिमी मध्य प्रदेश में 11 प्रतिशत कम पानी गिरा है।
दक्षिण-पश्चिम राजस्थान, कच्छ और पाकिस्तान सीमा पर निम्न दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। इसके प्रभाव से चक्रवाती हवाओं का घेरा सक्रिय है। वहीं, मानसून ट्रफ उदयपुर, रायसेन, पेंड्रा रोड, रांची और दीघा होते हुए बंगाल की खाड़ी तक फैली हुई है। ओडिशा और बंगाल तट पर भी हवाओं का चक्रवाती सिस्टम बना है।
(नोट: तापमान डिग्री सेल्सियस में है)
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प्रदेश में मानसून की वापसी अक्टूबर के पहले सप्ताह से शुरू होगी। गुना-ग्वालियर की तरफ से मानसून की वापसी एक अक्टूबर से होने की उम्मीद है। सिवनी तक पहुंचने में इसको लगभग सात दिन लगते हैं। पूरे प्रदेश की बात करें तो यह लगभग आठ दिन में प्रदेश को पार कर जाता है। - बीएस यादव, मौसम विज्ञानी