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MP में शहर और गांव के लिए एक होगा कॉलोनाइजर एक्ट, अध्यादेश लाने की तैयारी, अधिकारियों की जिम्मेदारी भी होगी तय

ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के लिए कालोनाइजर अधिनियम अलग-अलग हैं। इन्हें एक करके कड़े प्रावधान लागू करने का प्रारूप तैयार किया गया है, जिससे पंचायत एवं ग्...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Fri, 06 Mar 2026 07:27:06 PM (IST)Updated Date: Fri, 06 Mar 2026 07:27:06 PM (IST)
MP में शहर और गांव के लिए एक होगा कॉलोनाइजर एक्ट, अध्यादेश लाने की तैयारी, अधिकारियों की जिम्मेदारी भी होगी तय
शहर और गांव के लिए एक होगा कॉलोनाइजर एक्ट। (Image Source: AI-Generated)

HighLights

  1. अवैध कॉलोनियों पर सरकार का बड़ा प्रहार
  2. पंचायत और शहरों के लिए अब एक ही कानून
  3. अवैध निर्माण रोकने के लिए आएगा अध्यादेश

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश में शहरों से सटे ग्रामीण क्षेत्रों में कालोनियों का निर्माण तेजी के साथ हो रहा है। निगरानी की कमी के कारण अवैध कालोनियां भी बन रही हैं, जहां रहवासियों को आवश्यक सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं। यही स्थिति शहरी क्षेत्र में भी है। उधर, ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के लिए कालोनाइजर अधिनियम अलग-अलग हैं। इन्हें एक करके कड़े प्रावधान लागू करने का प्रारूप तैयार किया गया है, जिससे पंचायत एवं ग्रामीण व नगरीय विकास एवं आवास विभाग सहमत हैं।

अध्यादेश के माध्यम से लागू होगा नया नियम

एकीकृत कालोनाइजर अधिनियम बजट सत्र में प्रस्तुत करना प्रस्तावित था लेकिन वरिष्ठ सचिव समिति की बैठक नहीं हो पाई। अब इसे अध्यादेश के माध्यम से लागू करने की तैयारी है। प्रदेश में तेजी के साथ शहरीकरण हो रहा है। शहरों में भूखंड का मूल्य अधिक होने से पास की पंचायतों में तेजी के साथ नई-नई कॉलोनियां विकसित हो रही हैं।


अवैध निर्माण और पंचायतों की चुनौतियां

दरअसल, पंचायत क्षेत्र में कालोनाइजर को आसानी से अनुमतियां मिल जाती हैं। कालोनाइजर कालोनी बनाकर निकल जाते हैं लेकिन आवश्यक सुविधाओं का विकास नहीं करते हैं। पंचायतें भी ध्यान नहीं देती हैं और जब यह कालोनियां नगरीय निकायों में शामिल होती हैं तो फिर विकास से जुड़े मुद्दे खड़े हो जाते हैं। अवैध कालोनियों को नियमित करने का प्रविधान कुछ समय के लिए किया गया था लेकिन वर्तमान में यह बंद हैं।

सरकार का कड़ा रुख और विधानसभा में चर्चा

विधानसभा के बजट सत्र में पूर्व विधायक डॉ. सीतासरन शर्मा सहित अन्य विधायकों ने भी अवैध कालोनी का विषय उठाया था। इस पर नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने माना था कि अवैध कालोनियां बड़ी समस्या हैं। ये बने ही न, इसके लिए कड़े प्रविधान करने जा रहे हैं। विधेयक तीन माह बाद होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र में प्रस्तुत किया जाएगा।

सिंगल विंडो सिस्टम और समान लाइसेंस नीति

उधर, सरकार ने तय किया है कि नगरीय क्षेत्रों के लागू कालोनाइजर नियम जैसे ही पंचायत क्षेत्र में भी लागू किए जाएंगे। एक ही लायसेंस से कालोनाइजर कहीं भी काम कर सकेंगे। इसमें नक्शा पास कराने से लेकर अन्य अनुमतियां सिंगल विंडो सिस्टम से मिलेंगी। निर्धारित अधोसंरचना विकास करना होगा और इसके उल्लंघन पर कार्रवाई होगी।

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सिंहस्थ क्षेत्र में बनीं कालोनियों को लेकर चिंता

उधर, सरकार इस प्रावधान को जल्द से जल्द लाना चाहती है क्योंकि सिंहस्थ क्षेत्र में कई अवैध कालोनियां बन गई हैं। एक प्रावधान होने से समस्या का काफी हद तक समाधान हो जाएगा। इसके बाद भी यदि अवैध कालोनी बनती है तो जिसके क्षेत्र में ऐसा पाया जाएगा, उस अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई होगी। नगरीय निकाय और पंचायत विभाग के अधिकारियों के साथ एसडीएम, अपर कलेक्टर और कलेक्टर की भी जिम्मेदारी तय होगी। एक पोर्टल भी बनाया जाएगा, जिसमें कालोनी से संबंधित सभी स्थिति स्पष्ट रहेगी ताकि जो कोई भी उसमें संपत्ति खरीदे, उसे स्थिति स्पष्ट हो जाए।