
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। शहर की स्ट्रीट लाइटें अब मैनुअल के बजाय आटोमैटिक तरीके से चालू और बंद होंगी। नगर निगम करीब 300 सीसीएमएस (सेंट्रलाइज्ड कंट्रोल एंड मॉनिटरिंग सिस्टम) लगाने की तैयारी कर रहा है। इस पर लगभग तीन करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
सीसीएमएस लगने के बाद स्ट्रीट लाइटें निर्धारित समय के अनुसार अपने आप संचालित होंगी। इससे संचालन व्यवस्था व्यवस्थित होने के साथ करीब 15 प्रतिशत तक बिजली की बचत होने की उम्मीद है। खास बात यह है कि इस सिस्टम से स्ट्रीट लाइट के नेटवर्क में होने वाली बिजली चोरी का भी पता लगाया जा सकेगा।
निगम के अनुसार, शहर में करीब 68 हजार स्ट्रीट लाइटें हैं, जिनमें से 48 हजार नगर निगम की हैं और 20 हजार स्मार्ट सिटी द्वारा लगाई गई थीं। स्मार्ट सिटी की सभी लाइटें पहले से ही सीसीएमएस से जुड़ी हुई हैं, जबकि निगम ने पूर्व में शहर के कुछ क्षेत्रों में करीब 100 सीसीएमएस पैनल लगाकर ट्रायल भी किया है, जिससे करीब 10 हजार लाइटों को जोड़ा गया है।
ट्रायल के बाद बिजली बिलों के विश्लेषण में करीब 15 प्रतिशत मासिक बचत सामने आई। अब निगम करीब तीन करोड़ रुपये खर्च कर 300 नए सेंट्रलाइज्ड कंट्रोल एंड मानिटरिंग सिस्टम लगाएगा, जिससे शेष सभी स्ट्रीट लाइटों को जोड़ा जाएगा।
अभी स्ट्रीट लाइटों को मैनुअल तरीके से चालू और बंद किया जाता है। शाम करीब पांच बजे से लाइटें चालू करने की प्रक्रिया शुरू होती है और पूरे शहर की लाइटें शाम सात बजे तक जल पाती हैं। इसी तरह सुबह लाइटें बंद करने में भी करीब दो घंटे लग जाते हैं। इससे करीब 15 प्रतिशत तक अतिरिक्त बिजली की खपत होती है। सीसीएमएस से शाम करीब 6:30 बजे लाइटें एक साथ आटोमैटिक रूप से चालू की जा सकेंगी।
करीब 20 किलोवाट लोड क्षमता वाले एक सीसीएमएस पर लगभग 15 किलोवाट तक का लोड दिया जाएगा। एक पैनल से करीब 100 स्ट्रीट लाइटों को नियंत्रित और मानिटर किया जा सकेगा। किसी क्षेत्र में निर्धारित लोड से अधिक बिजली खपत होने पर सिस्टम के जरिए इसका पता चल सकेगा। निगम का मानना है कि लोड बढ़ने की स्थिति में यह संकेत मिल जाएगा कि कहीं बिजली का अनधिकृत उपयोग या चोरी तो नहीं हो रही है।
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स्ट्रीट लाइटों को ऑटोमैटिक रूप से चालू-बंद करने के लिए सीसीएमएस लगाने की योजना है। इससे पूरे शहर की स्ट्रीट लाइटें निर्धारित समय पर आटोमैटिक तरीके से चालू-बंद हो सकेंगी। साथ ही स्ट्रीट लाइटों की निगरानी भी आसान हो सकेगी। - अक्षय तेम्रवाल, अपर आयुक्त, नगर निगम