
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। दतिया विधानसभा सीट के उपचुनाव में पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों द्वारा की गई पार्टी विरोधी गतिविधियों का नुकसान आखिरकार उन्हें भुगतना पड़ गया। भाजपा के नए प्रदेश प्रभारी बिप्लब कुमार देब के दूसरे प्रवास के बाद प्रदेश भाजपा के कोर ग्रुप का पुनर्गठन किया गया। इसमें नरोत्तम मिश्रा का नाम कट गया। पहले कोर ग्रुप में 20 सदस्य होते थे, वहीं अब 19 रह गए हैं।
इसी साल जुलाई में दतिया विधानसभा सीट के लिए हुए उपचुनाव में नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं मिला था। इसके बाद उनके समर्थकों ने जमकर बवाल काटा था। भाजपा ने यहां से आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया था। पार्टी को पराजय का मुंह देखना पड़ा था। बाद में पार्टी ने नरोत्तम समर्थक जिलाध्यक्ष और पूरी कार्यकारिणी को भंग कर दिया था।
शिवराज सिंह सरकार में कभी नंबर दो की हैसियत रखने वाले नरोत्तम मिश्रा को मुख्यमंत्री पद का दावेदार तक माना गया था। भाजपा के केंद्रीय संगठन ने प्रदेश की राजनीति में पीढ़ीगत बदलाव के जो संकेत दिए हैं, उसकी गाज नरोत्तम मिश्रा पर ही गिरी है। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में दतिया सीट से हारने के बाद नरोत्तम मिश्रा को उम्मीद थी कि उपचुनाव में पार्टी उन्हें मौका देगी। दतिया सीट कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को आपराधिक मामले में सजा होने से खाली हुई थी। नरोत्तम मिश्रा ने उपचुनाव के लिए नामांकन पत्र तक खरीद लिया था, लेकिन पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया।
समर्थकों द्वारा किए गए उत्पात के बाद से ही उनकी उपेक्षा शुरू हुई। अक्टूबर में प्रदेश भाजपा कोर ग्रुप की महत्वपूर्ण बैठकों में नरोत्तम मिश्रा को नहीं बुलाया गया। राज्य में पार्टी के प्रदेश प्रभारी और प्रदेश संगठन महामंत्री को बदले जाने के बाद कोर ग्रुप की सूची को अपडेट किया गया। इसमें नरोत्तम मिश्रा का नाम नहीं है। बता दें, मध्य प्रदेश में सत्ता और संगठन में समन्वय के लिहाज से भाजपा में कोर ग्रुप व्यवस्था वर्ष 2020 में शुरू हुई थी।
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