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भोपाल मंडल के 5 रेलवे स्टेशनों पर बनेंगे नए FOB; बिजली लाइन बनी रोड़ा, शिफ्टिंग पर खर्च होंगे ₹7.90 करोड़

भोपाल मंडल के पलासनेर, चारखेड़ा, पगढाल, धरमकुंडी और डुलरिया रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को ट्रैक पार करने से बचाने के लिए फुटओवर ब्रिज बनाने की तैयारी...और पढ़ें

By anjali tomarEdited By: bhupendra Singh Rajput
Publish Date: Wed, 30 Sep 2026 07:42:40 PM (IST)Updated Date: Wed, 30 Sep 2026 07:42:40 PM (IST)
भोपाल मंडल के 5 रेलवे स्टेशनों पर बनेंगे नए FOB; बिजली लाइन बनी रोड़ा, शिफ्टिंग पर खर्च होंगे ₹7.90 करोड़
प्रतीकात्मक फोटो, सौ- इंटरनेट मीडिया।

HighLights

  1. भोपाल मंडल के पांच स्टेशनों पर बनेगा एफओबी
  2. बिजली लाइन शिफ्टिंग करने पर 7.90 करोड़ खर्च
  3. बिजली व्यवस्था बदलने के लिए 6 माह की समय-सीमा तय

नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। भोपाल मंडल के पांच रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को ट्रैक पार करने से बचाने के लिए फुटओवर ब्रिज (एफओबी) बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए रेलवे करीब 7.90 करोड़ रुपये खर्च करेगा। इसमें पाल , सीआरके, पीजीएल, डीकेआई और डीआरए स्टेशन शामिल हैं।

हालांकि, ब्रिज का निर्माण शुरू करने से पहले रेलवे को ट्रैक के ऊपर बिछी बिजली की लाइन और उसके रास्ते में आने वाले उपकरणों को हटाकर दूसरी जगह लगाना होगा। इसी काम के लिए यह राशि खर्च की जाएगी।

बिजली लाइन से अटक रहा काम

फुटओवर ब्रिज जहां बनाया जाना है, वहां ऊपर से गुजर रही बिजली की लाइन ब्रिज के ढांचे से टकरा सकती है। इसलिए रेलवे पहले बिजली की पूरी व्यवस्था को नए सिरे से व्यवस्थित करेगा।

इसके लिए जरूरत के मुताबिक नए मास्ट और स्टील के ढांचे लगाए जाएंगे। बिजली लाइन को इन नए ढांचों से जोड़ा जाएगा। पुराने ब्रैकेट और रास्ते में आने वाले दूसरे ढांचे भी हटाए जाएंगे।

इसके साथ ही बिजली लाइन को सुरक्षित रखने के लिए इंसुलेटर, कॉपर जंपर और स्ट्रक्चर बॉन्ड लगाए जाएंगे। करंट से सुरक्षा के लिए अर्थिंग सिस्टम भी तैयार किया जाएगा।

यानी ब्रिज का काम शुरू होने से पहले ट्रैक के ऊपर की बिजली व्यवस्था को सुरक्षित तरीके से दूसरी जगह शिफ्ट किया जाएगा। रेलवे की योजना सिर्फ बिजली लाइन को हटाने तक सीमित नहीं है।

काम के दौरान यात्रियों और ट्रेनों की सुरक्षा के लिए अलग-अलग जगह कॉशन बोर्ड, इंजन स्टॉप बोर्ड, सिग्मा बोर्ड और रिफ्लेक्टिव नंबर प्लेट भी लगाई जाएंगी। रेलवे ने इस पूरे काम को 6 महीने में पूरा करने की समय-सीमा तय की है।


ऐसे बदली जाएगी बिजली की व्यवस्था

-ब्रिज के लिए जरूरी जगह पर नींव और कंक्रीट का काम किया जाएगा।

-ट्रैक के ऊपर बिजली लाइन को सहारा देने के लिए नए मास्ट और स्टील स्ट्रक्चर लगाए जाएंगे।

-ब्रिज के रास्ते में आने वाले बिजली उपकरणों को दूसरी जगह शिफ्ट किया जाएगा।

-नई जगह पर इंसुलेटर, कॉपर जंपर और स्ट्रक्चर बॉन्ड लगाए जाएंगे।

-करंट से सुरक्षा के लिए अर्थिंग सिस्टम तैयार किया जाएगा।

-जरूरत के मुताबिक पुराने ब्रैकेट और दूसरे ढांचे हटाए जाएंगे।

-यात्रियों और ट्रेनों की सुरक्षा के लिए नए साइन बोर्ड और रिफ्लेक्टिव नंबर प्लेट लगाई जाएंगी।

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ट्रैक पार करने की जरूरत नहीं पड़ेगी

फुटओवर ब्रिज बनने के बाद यात्रियों को एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म जाने के लिए ट्रैक पर उतरने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अभी जिन स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म बदलने के लिए यात्रियों को ट्रैक पार3 करना पड़ता है, वहां यह व्यवस्था सुरक्षित रास्ता देगी।

खासकर ट्रेन आने-जाने के दौरान ट्रैक पर पैदल जाने का जोखिम कम होगा। वहीं, ब्रिज के निर्माण से पहले बिजली लाइन और उसके उपकरणों को व्यवस्थित करने से निर्माण के दौरान भी परेशानी कम होगी।

बिजली की लाइन को नए मास्ट और स्ट्रक्चर पर शिफ्ट करने के बाद ब्रिज के ढांचे के लिए जरूरी जगह तैयार की जा सकेगी।