नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल । गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन में अब सिर्फ एक सप्ताह बचा है, लेकिन वैकल्पिक विसर्जन कुंडों की सालभर पुरानी योजना अधूरी है। नगर निगम ने एनजीटी के निर्देश के बाद नौ स्थानों पर कुंड बनाने की योजना तैयार की थी।
इनमें से मालीखेड़ी में काम पूरा हो चुका है, लेकिन यहां भी इस बार विसर्जन नहीं हो सकेगा। नीलबड़ में अभी काम चल रहा है।
पुराने पारंपरिक घाटों पर ही विसर्जन
बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी परिसर में बनने वाले विसर्जन कुंड के लिए जमीन आवंटित नहीं हो सकी, जिसके बाद इसे निरस्त कर दिया गया, जबकि छह स्थानों पर टेंडर तक नहीं हो सके हैं। ऐसे में इस बार भी निगम को तालाब और अन्य जलस्त्रोतों पर बने पुराने पारंपरिक घाटों पर ही विसर्जन की व्यवस्था करनी पड़ेगी।
बता दें कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने बड़े और छोटे तालाब सहित शहर के अन्य जलस्त्रोतों में प्रतिमा विसर्जन पर रोक लगाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद निगम ने जुलाई 2025 में मालीखेड़ी, नीलबड़, बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, संजीव नगर, हथाईखेड़ा, पांच नंबर, शाहपुरा, प्रेमपुरा और समरधा में वैकल्पिक घाट विकसित करने का प्रस्ताव तैयार किया था।
डीपीआर बनाकर दावा किया गया था कि गणेशोत्सव तक घाट तैयार हो जाएंगे, लेकिन अभी तक इनमें से एक भी घाट विसर्जन के लिए तैयार नहीं हो सका है।
- समीक्षा में सामने आई थी काम शुरू न होने की स्थिति
नवंबर 2025 की निगम समीक्षा में ही अधिकांश स्थानों पर काम शुरू नहीं होने की स्थिति सामने आ गई थी। इसके बाद प्रक्रिया आगे बढ़ी, लेकिन सितंबर 2026 तक स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं आया। मालीखेड़ी में विसर्जन घाट का काम पूरा हो चुका है, लेकिन इसमें भी इस साल विसर्जन नहीं हो सकेगा।
वैकल्पिक व्यवस्था समय पर तैयार नहीं होने से निगम तालाबों और जलस्त्रोतों पर बने पुराने घाटों पर ही इंतजाम कर रहा है।
- निगम ने पुराने विसर्जन स्थलों पर कीं व्यवस्थाएं
भगवान गणेश की प्रतिमाओं का विसर्जन अनंत चतुर्दशी पर 25 सितंबर से शुरू होगा। इसके लिए निगम ने पुराने विसर्जन स्थलों पर क्रेन, पोकलेन और गोताखोरों की व्यवस्था शुरू कर दी है। 16 सितंबर को महापौर मालती राय ने प्रमुख घाटों का निरीक्षण कर तैयारियों का जायजा लिया।
बड़ी प्रतिमाओं को क्रेन और पोकलेन से जल में उतारने तथा गोताखोरों की 24 घंटे तैनाती की व्यवस्था की जा रही है।
- किस घाट की क्या स्थिति
1. मालीखेड़ी - काम पूरा हो चुका है, लेकिन इस घाट पर विसर्जन नहीं किया जाएगा।
2. नीलबड़ - काम शुरू हो चुका है।
3. बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी - यूनिवर्सिटी की तरफ जमीन आवंटित न होने से कैंसिल हो गया।
4. संजीव नगर - टेंडर नहीं हो सका।
5. हथाईखेड़ा - टेंडर नहीं हो सका।
6. पांच नंबर - टेंडर नहीं हो सका।
7. शाहपुरा - टेंडर नहीं हो सका।
8. प्रेमपुरा - टेंडर नहीं हो सका।
9. समरधा - टेंडर नहीं हो सका।
हर बार की तरह पारंपरिक विसर्जन घाटों पर मूर्ति विसर्जन होगा, जो नए विसर्जन घाट बनाए जा रहे हैं, वह अभी तैयार नहीं हैं। पारंपरिक विसर्जन घाटों पर विसर्जन पर एनजीटी द्वारा रोक लगाने और विसर्जन की अनुमति एनजीटी से लेने की जानकारी मुझे नहीं है। - संतोष गुप्ता, मुख्य अभियंता, झील संरक्षण प्रकोष्ठ, नगर निगम