
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। शाहपुरा तालाब के स्टाप डैम को तोड़कर पानी बहाए जाने के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में शुक्रवार को सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति शिव कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने मामले से जुड़े सभी पक्षों को विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए तीन सप्ताह की मोहलत दी है।
अब अगली सुनवाई 27 नवंबर को होगी। यह सुनवाई कोर्ट द्वारा लिए गए स्वतः संज्ञान और याचिकाकर्ता नितिन सक्सेना द्वारा मप्र स्टेट वेटलैंड अथॉरिटी के खिलाफ दायर याचिका पर एक साथ हुई। सुनवाई के दौरान आवेदक के वकील ने प्रशासनिक स्तर पर रिपोर्ट दाखिल करने में हो रही देरी का मुद्दा उठाया।
इस पर एमपीपीसीबी की वकील पारुल भदौरिया ने स्टेटस रिपोर्ट पेश कर बताया कि कलेक्टर के निर्देश पर तालाब क्षेत्र का सीमांकन व पहचान पूरी हो चुकी है। वहीं, राज्य सरकार के वकील ने दलील दी कि तालाब का क्षेत्र तीन से चार तहसीलों में फैला होने के कारण संयुक्त दौरे व समन्वय में वक्त लगा। सरकार ने आश्वस्त किया कि सर्वेक्षण रिपोर्ट लगभग तैयार है, जिसे तीन हफ्तों में पेश कर दिया जाएगा।
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नेशनल हाईवे निर्माण के बदले अनिवार्य पौधारोपण में हीलाहवाली पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने कड़ा रुख अपनाया है। आवेदक नितिन सक्सेना की ओर से अधिवक्ता हरप्रीत सिंह गुप्ता ने ट्रिब्यूनल में सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (सीईसी) की शर्तों के उल्लंघन का मामला उठाया, जिस पर एनजीटी ने एनएचएआई, राज्य सरकार, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर निगम से जवाब तलब किया है।
सुनवाई के दौरान एनएचएआइ के वकील ने सफाई देते हुए बताया कि संस्था अब तक करीब 35 हजार पौधे लगा चुकी है। जमीन की अनुपलब्धता के कारण काम अटका था, लेकिन अब जिला प्रशासन से भूमि मिलने के बाद रोपण में तेजी आइ है।
वहीं, राज्य सरकार ने प्रदेशभर के जिलों से डेटा संकलित करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा। एनजीटी ने एनएचएआइ को अपनी विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के लिए चार हफ्ते का समय दिया है, जबकि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर निगम को एक सप्ताह में रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 15 दिसंबर को होगी।