
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। एमपी, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के शहरों से निकलने वाले सीवेज के उपचार के लिए पर्याप्त क्षमता नहीं है। इसके अलावा कई घर अब भी सीवेज नेटवर्क से नहीं जुड़े हैं। इस पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने तीनों राज्यों से सीवेज को नदियों, तालाबों और झीलों में पहुंचने से रोकने और उसके उपचार की व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है।
अधिकरण ने स्पष्ट किया कि बिना उपचारित सीवेज को जलस्रोतों या खुले स्थानों में छोड़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती। राज्यों को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के निर्माण से लेकर उनके पूरी क्षमता से संचालन और उपचारित पानी के दोबारा उपयोग तक की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।
मंगलवार को एनजीटी की भोपाल स्थित सेंट्रल जोन बेंच में न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति श्यो कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ में हुई सुनवाई में सामने आया कि शहरों में जितना सीवेज पैदा हो रहा है, उसके उपचार के लिए उपलब्ध क्षमता पर्याप्त नहीं है। कई घर अब भी सीवेज नेटवर्क से नहीं जुड़े हैं, जबकि एसटीपी निर्माण और उपचारित पानी के पुनः उपयोग में भी कमियां बनी हुई हैं।
अधिकरण ने कहा कि जिन एसटीपी को दिसंबर 2026 तक पूरा किया जाना है, उनका निर्माण तय समय सीमा में पूरा होना चाहिए। निर्धारित अवधि में काम पूरा नहीं होने पर संबंधित निर्माण एजेंसियों पर सीपीसीबी के मानकों के अनुसार पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की जिम्मेदारी तय की जा सकती है।
एनजीटी ने निर्देश दिए कि जलस्रोतों में बिना उपचारित सीवेज का प्रवाह रोका जाए और उपचारित पानी का उपयोग सीपीसीबी के दिशा-निर्देशों या राज्य द्वारा तय मानकों के अनुसार किया जाए। पीठ ने कहा कि पहले तय समय सीमा समाप्त हो चुकी है, इसलिए राज्यों को अब ठोस कार्रवाई करनी होगी। अगली सुनवाई चार जनवरी 2027 को होगी।
यह भी पढ़ें- एमपी में DGP के पड़ोसी के घर चोरी, IAS विवेक पोरवाल के बंगले से चंदन का पेड़ ले उड़े चोर, CCTV में दिखे तीन संदिग्ध
इधर, बरखेड़ा पठानी में करोड़ों रुपये खर्च कर बनाया गया सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) छह महीने से बंद है और आसपास गंदगी व बदबू फैल रही है। बरखेड़ा पठानी स्थित भेल के इस प्लांट की बदहाल स्थिति पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं।
साथ ही प्रदेश सरकार, कलेक्टर, मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नगर निगम आयुक्त और भेल के जनसंपर्क अधिकारी को छह सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर के नामित प्रतिनिधि और मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधि की संयुक्त समिति मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति की जांच करेगी, जिसे तथ्यात्मक रिपोर्ट और अब तक की कार्रवाई का ब्योरा देना होगा। मामले की अगली सुनवाई 17 दिसंबर को होगी।