'सीवेज नहीं रोका तो हर बारिश में मरेंगी मछलियां': भोपाल के छोटे तालाब की बदहाली पर NGT की सख्ती, 4 विभागों से जवाब तलब
छोटे तालाब में मछलियों की मौत पर एनजीटी ने स्वत: संज्ञान लेते हुए कलेक्टर, नगर निगम, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और मत्स्य संचालनालय को नोटिस जारी कर छह सप...और पढ़ें
Publish Date: Sat, 25 Jul 2026 08:55:06 AM (IST)Updated Date: Sat, 25 Jul 2026 08:55:06 AM (IST)
फाइल फोटो।HighLights
- छोटे तालाब में मछलियों की मौत पर एनजीटी सख्त
- सीवेज प्रदूषण को माना मुख्य कारण
- चार सदस्यीय संयुक्त समिति करेगी जांच
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। छोटे तालाब में सीवेज प्रदूषण के कारण बड़ी संख्या में मछलियों की मौत के मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने स्वत: संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार और संबंधित विभागों से जवाब तलब किया है।
अधिकरण ने इसे गंभीर पर्यावरणीय चिंता का विषय माना है और छह सप्ताह के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान एनजीटी की भोपाल स्थित सेंट्रल जोन बेंच ने कहा कि मानसून की शुरुआत के साथ छोटे तालाब में बड़ी संख्या में मरी हुई मछलियां मिलने की घटना सामान्य नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, तालाब में लगातार मिल रहे सीवेज और पानी में घुलित ऑक्सीजन की कमी इसके प्रमुख कारण हैं।
तालाब के पानी में ऑक्सीजन की कमी
अधिकरण ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि गर्मी के मौसम में तालाब के पानी की अलग-अलग परतें बन जाती हैं। पहली बारिश के दौरान ये परतें आपस में मिलती हैं, जिससे नीचे जमा प्रदूषित और ऑक्सीजन रहित पानी सतह पर आ जाता है। वहीं, सीवेज के साथ आने वाले जैविक अपशिष्ट के विघटन से पानी में घुलित ऑक्सीजन का स्तर और तेजी से घट जाता है, जिसके कारण बड़ी संख्या में मछलियों की मौत होती है।
एनजीटी ने कहा कि यदि छोटे तालाब में बिना शोधन वाला सीवेज प्रवेश करना नहीं रोका गया और जल गुणवत्ता में सुधार के प्रभावी उपाय नहीं किए गए तो हर वर्ष मानसून के दौरान ऐसी घटनाएं दोहराई जाती रहेंगी।
नोटिस जारी कर मांगा जबाव
अधिकरण ने इस मामले में कलेक्टर, मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव, नगर निगम आयुक्त तथा मत्स्य संचालनालय के संचालक को पक्षकार बनाते हुए नोटिस जारी किए हैं। सभी संबंधित विभागों को छह सप्ताह के भीतर अपना जवाब और कार्रवाई का विवरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
18 सितंबर को होगी सुनवाई
मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर को होगी।संयुक्त समिति करेगी जांचएनजीटी ने मामले की वस्तुस्थिति जानने के लिए चार सदस्यीय संयुक्त समिति गठित की है। इसमें केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के जलीय विज्ञान विभाग, कृषि एवं मत्स्य विभाग तथा मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
समिति मौके का निरीक्षण कर छह सप्ताह के भीतर तथ्यात्मक एवं कार्रवाई संबंधी रिपोर्ट अधिकरण में प्रस्तुत करेगी। इस पूरी प्रक्रिया के लिए मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोडल एजेंसी बनाया गया है।