
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। मध्य प्रदेश और राजस्थान के सीमावर्ती जिलों से महाराष्ट्र में बच्चियों को ले जाकर बेचे जाने की बात सामने आने पर राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने स्वतः संज्ञान लेकर जांच प्रारंभ की है। आयोग ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशकों से दो सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
15 दिनों में जवाब देने के लिए कहा गया है। इसमें वस्तुस्थिति, पुलिस द्वारा पकड़े गए मामले, रोकने के प्रयास आदि की जानकारी चाही गई है। पिछले माह मीडिया में आई खबरों के आधार पर आयोग ने संज्ञान लिया है।
मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि मध्य प्रदेश और राजस्थान की सीमाओं से लगे कई जिलों में माता-पिता अपनी नाबालिग बेटियों को बिचौलियों को तीन से पांच लाख रुपये में बेच रहे हैं। इसके बाद, बिचौलिए इनके झूठे दस्तावेज के आधार पर अपना गोद लिया हुआ बच्चा बताकर उनकी तस्करी करते हैं।
जब ये लड़कियां बड़ी हो जाती हैं, तो उनकी पहचान छुपाने के लिए उनके निजी विवरण बदल दिए जाते हैं और उन्हें महाराष्ट्र के विभिन्न शहरों में यौन व्यापार के लिए 35 लाख से 40 लाख रुपये में बेच दिया जाता है। रिपोर्ट में कुछ मामलों का भी उल्लेख बिना पहचान दिए किया गया है। आयोग का मानना है कि मीडिया रिपोर्ट में दी गई जानकारी सच है, तो यह पीड़ित बच्चियों के मानवाधिकारों के उल्लंघन का गंभीर मामला है।
मध्य प्रदेश से गायब 2600 बच्चियों को खोज नहीं पाई पुलिस। मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय की महिला सुरक्षा शाखा की रिपोर्ट के अनुसार 2,600 बालिकाएं 10 वर्ष से गायब हैं, पर पुलिस खोज नहीं पाई है।
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