
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश के निजी मेडिकल कॉलेजों में मैनेजमेंट कोटा नहीं रहेगा। पहले की तरह 85 प्रतिशत सीटें स्टेट कोटा और 15 प्रतिशत एनआरआई कोटे की होंगी। इसी तरह से चौथा चरण यानी कॉलेज स्तर की काउंसलिंग को हाइब्रिड मॉडल की जगह सिर्फ ऑनलाइन करने का प्रस्ताव था लेकिन इसे भी स्वीकृति नहीं मिली। प्रदेश के निजी और सरकारी मेडिकल व डेंटल कॉलेजों में एमबीबीएस और बीडीएस पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए काउंसलिंग की प्रक्रिया पांच अगस्त से पंजीयन के साथ प्रारंभ होने जा रही है।
चिकित्सा शिक्षा संचालनालय ने निजी कॉलेजों में 35 प्रतिशत मैनेजमेंट कोटा फिर प्रारंभ करने का प्रस्ताव भेजा था, पर शासन की स्वीकृति नहीं मिली है। सूत्रों के अनुसार स्वास्थ्य विभाग देख रहे उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल भी इसके पक्ष में नहीं थे, क्योंकि इसमें प्रतिभावान विद्यार्थियों का नुकसान है। बता दें, वर्ष 2014 से पीएमटी की जगह नीट से प्रवेश होने के बाद से निजी कॉलेजों में मैनेजमेंट कोटा राज्य सरकार ने बंद कर दिया था।
प्रदेश में वर्तमान में 19 शासकीय और 14 निजी मेडिकल कॉलेज संचालित हैं। पिछले शैक्षणिक सत्र में शासकीय कॉलेजों में एमबीबीएस की 2,850 और निजी कॉलेजों में 2,700 सीटें थीं। इस शैक्षणिक सत्र में पहले चरण की काउंसलिंग का सीट चार्ट अभी जारी नहीं हुआ है, पर सीटों की संख्या में ज्यादा परिवर्तन आने की संभावना नहीं है। नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) से कॉलेजों की मान्यता और सीट वृद्धि की प्रक्रिया अभी भी चल रही है इसलिए काउंसलिंग के दौरान भी कुछ सीमा तक सीटों में कमी या वृद्धि हो सकती है।
चिकित्सा शिक्षा संचालनालय ने दमोह, बुधनी और छतरपुर मेडिकल कॉलेज में इस सत्र से एमबीबीएस पाठ्यक्रम प्रारंभ करने के लिए एनएमसी को आवेदन किया है। कॉलेजों का भवन तैयार हो गया है। फैकल्टी की भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। एनएमसी के मापदंड के अनुसार फैकल्टी मिलने पर इन्हें भी मान्यता मिल सकती है।
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