
पंकज श्रीवास्तव, नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। भोपाल के सुनियोजित विकास के दावे के साथ लाए गए भोपाल मास्टर प्लान 2047 में सबसे अहम कड़ी यानी लोकल एरिया प्लान (एलएपी) को ही नीतिगत स्पष्टता से दूर कर दिया गया है। नगर नियोजन का स्थापित नियम है कि पूरे शहर के लिए केवल कागजी खाका खींचने के बजाय जब तक जोन और वार्ड स्तर पर जमीनी योजनाएं तैयार नहीं होंगी, तब तक टिकाऊ विकास संभव नहीं है।
अफसोस की बात यह है कि अफसरों ने एलएपी के माइक्रो-प्लानिंग मॉडल पर गंभीरता से फोकस नहीं किया। प्रारूप में यह कहीं तय नहीं है कि ये लोकल एरिया प्लान कब बनेंगे और कब लागू होंगे। समय-सीमा तय न होने के कारण शहर में बिना वहन-क्षमता के बहुमंजिला और निर्माण की अनुमति मिलने लगेगी, जिससे पुराने और नए रिहायशी इलाकों का शहरी संतुलन पूरी तरह बिगड़ना तय है।
जमीन का सीमांकन नहीं, चरमराएगा सिस्टम
जब तक जोन स्तर पर लोकल एरिया प्लान अधिसूचित नहीं होते, तब तक बढ़ी हुई आबादी के अनुपात में नागरिक सेवाओं का विस्तार असंभव रहेगा:
एक्सपर्ट व्यू : जोन वाइज प्लान के बिना विकास सिर्फ कागजी कवायद
मास्टर प्लान सिर्फ एक व्यापक नीतिगत दस्तावेज होता है। असली विकास जमीन पर तब दिखता है जब हर जोन और सेक्टर का अलग लोकल एरिया प्लान बने। जब पिछले 30 सालों में सार्वजनिक उपयोगिताओं और सड़कों का 50 से 70 प्रतिशत काम अधूरा रह गया, तो नए ड्राफ्ट में एलएपी की बाध्यकारी डेडलाइन तय करना सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए थी। जब तक किसी जोन में सीवेज, पानी और बिजली नेटवर्क की प्रमाणित क्षमता तय न हो, तब तक वहां अतिरिक्त निर्माण की अनुमति देना सीधे तौर पर शहर के आधारभूत ढांचे को ध्वस्त करने जैसा होगा। संविधान के 74वे संशोधन के अनुसार लोकल एरिया प्लान बनाने का अधिकार एवं उत्तरदायित्व स्थानीय नगर निगम का है। - सुमित गोठी, सचिव, इंस्टीट्यूट ऑैफ टाउन प्लानर इंडिया
मेट्रो के 500 मीटर एरिया को शामिल किया
जो एजेंसी एलएपी बनाएंगी वह उस एरिया का रीडवलपमेंट करेगी। मेट्रो, नगर निगम और राज्य सरकार के उपक्रम द्वारा एलएपी बना सकती है। टीओडी में मेट्रो के 500 मीटर एरिया एलएपी को शामिल किया गया है। - नीरज आनंद लिखार, संयुक्त संचालक, टीएंडसीपी