
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश के विभिन्न जिलों में पिछले वर्ष पदस्थ 3500 बांडेड डॉक्टरों में से लगभग एक हजार ने अस्पताल गए बिना ही सार्थक एप्लीकेशन पर हाजिरी लगाई। स्वास्थ्य संचालनालय की जांच में पता चला है कि यह गड़बड़ी वर्ष 2023 के पहले से चल रही थी, पर निगरानी की सटीक व्यवस्था नहीं होने के कारण पकड़ में नहीं आई। इसमें अधिकतर जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) और सिविल सर्जन यानी जिला अस्पताल अधीक्षकों की लापरवाही भी सामने आई है।
स्वास्थ्य संचालनालय ने सभी जिलों के सीएमएचओ और सिविल सर्जन को आदेश दिए थे कि बांडेड डॉक्टरों का कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र सार्थक मोबाइल एप्लीकेशन पर उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के बाद ही दिया जाए, पर आदेश की अवहेलना कर बिना उपस्थिति देखे ही प्रमाण पत्र दिए गए। ऐसे में अब स्वास्थ्य संचालनालय के वरिष्ठ संयुक्त संचालक राजू निदानिया ने तत्कालीन और वर्तमान मिलाकर 70 सीएमएचओ और सिविल सर्जन को कारण बताओ नोटिस जारी कर 15 दिनों में उत्तर मांगा है। जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर किसी की एक तो किसी की दो वेतनवृद्धि रोकने की बात कही है।
ऐसे डॉक्टरों का अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) भी संचालनालय ने रोक दिया है। दरअसल, फर्जी उपस्थिति का खेल तो कई वर्ष से चल रहा था, पर संचालनालय स्तर पर निगरानी की व्यवस्था नहीं होने से ऐसे डॉक्टर पकड़े नहीं जा रहे थे। अब संदेह के आधार पर संचालनालय की आईटी शाखा ने सार्थक एप में डॉक्टरों की उपस्थिति देखी तो बड़ा खेल सामने आया। एप में शर्त है कि डॉक्टर को अस्पताल परिसर से ही उपस्थिति दर्ज करनी है, पर वे 500 किमी दूर से हाजिरी लगा रहे थे। कुछ ने तो बिस्तर पर लेटे हुए हाजिरी लगाई, तो अधिकतर ने अपने दूसरे मोबाइल पर अपना फोटो खोलकर उपस्थिति दर्ज कर दी।
अब सभी जिलों में सीएमएचओ और सिविल सर्जन ऐसे डॉक्टरों को नोटिस देकर जवाब मांग रहे हैं। इनमें अधिकतर एमबीबीएस बांडेड डॉक्टर हैं। बता दें कि मेडिकल कॉलेजों के प्रवेश नियमों में शर्त है कि सरकारी-निजी मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस या एमडी-एमएस करने के बाद अनिवार्य सेवा बंधपत्र के अंतर्गत शासन द्वारा निर्धारित स्थान पर एक-एक वर्ष सेवा देनी होगी। इसके लिए उन्हें मानदेय दिया जाएगा।
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