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अब थानों में होगा पुलिसकर्मियों का इलाज, भोपाल के जूनियर डॉक्टरों की अनोखी पहल

अब खाकी वर्दी वालों को उपचार के लिए अस्पताल की लंबी कतारों में नहीं लगना होगा, बल्कि डॉक्टर खुद थाने पहुंचकर उनके स्वास्थ्य का परीक्षण करने के साथ ही ...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Mon, 05 Jan 2026 08:45:00 PM (IST)Updated Date: Mon, 05 Jan 2026 08:45:00 PM (IST)
अब थानों में होगा पुलिसकर्मियों का इलाज, भोपाल के जूनियर डॉक्टरों की अनोखी पहल
अब थानों में होगा पुलिसकर्मियों का इलाज

HighLights

  1. अब थानों में होगा पुलिस का इलाज, डॉक्टरों की टीम खुद पहुंचेगी
  2. मेंटल हेल्थ और लाइफस्टाइल बीमारियों की मौके पर होगी जांच
  3. पुलिसकर्मियों का बनेगा हेल्थ डेटा, गंभीर केस में तुरंत रेफरल

नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। काम के भारी दबाव और अनियमित दिनचर्या के चलते बीमारियों का शिकार हो रहे पुलिसकर्मियों के उपचार के लिए गांधी मेडिकल कालेज (जीएमसी) के जूनियर डाक्टरों ने नई पहल की है। अब खाकी वर्दी वालों को उपचार के लिए अस्पताल की लंबी कतारों में नहीं लगना होगा, बल्कि डॉक्टर खुद थाने पहुंचकर उनके स्वास्थ्य का परीक्षण करने के साथ ही उन्हें चिकित्सा उपलब्ध कराएंगे। इसके लिए प्रत्येक पुलिस थाने में नियमित स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएंगे।

लाइफस्टाइल बीमारियों की समय रहते पहचान

इस अभियान का मुख्य उद्देश्य पुलिस बल में तेजी से बढ़ रही लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों की समय रहते पहचान करना और उनका उपचार शुरू करना है। मालूम हो कि पुलिस की नौकरी में ड्यूटी के घंटे तय नहीं होते। त्योहार हो या वीआइपी मूवमेंट, पुलिसकर्मी घंटों खड़े रहकर ड्यूटी करते हैं। इस भागदौड़ और मानसिक दबाव के कारण उनमें हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियां घर कर रही हैं।


मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान

अक्सर देखा गया है कि जवान थकान और मानसिक अवसाद को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, जो बाद में घातक साबित होता है। इन शिविरों के माध्यम से जूनियर डाक्टर न केवल शारीरिक बीमारियों की जांच करेंगे, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य का भी आकलन करेंगे, ताकि डिप्रेशन और तनाव के स्तर को कम किया जा सके। थानों में लगने वाले इन विशेष शिविरों में पुलिसकर्मियों का पूरा हेल्थ प्रोफाइल तैयार किया जाएगा।

मौके पर जांच और गंभीर मामलों में रेफरल की सुविधा

इसमें शुगर, ब्लड प्रेशर, वजन और सामान्य शारीरिक जांच शामिल होगी। यदि किसी पुलिसकर्मी में गंभीर लक्षण पाए जाते हैं, तो उन्हें तत्काल गांधी मेडिकल कालेज या हमीदिया अस्पताल रेफर किया जाएगा, जहां उन्हें प्राथमिकता के आधार पर इलाज मिल सकेगा। डाक्टरों की टीम उन्हें खान-पान और जीवनशैली में सुधार के लिए परामर्श भी देगी।

पुलिसकर्मी समाज की सुरक्षा के लिए दिन-रात एक कर देते हैं, लेकिन इस प्रक्रिया में वे अक्सर अपनी सेहत को नजरअंदाज कर बैठते हैं। हमने देखा है कि कई जवान कम उम्र में ही बीपी और तनाव जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। इसको देखते हुए यह निर्णय लिया है कि हम थानों में जाकर उनकी स्क्रीनिंग करेंगे। इसमें शारीरिक जांच के साथ-साथ मेंटल हेल्थ काउंसलिंग पर भी हमारा विशेष जोर रहेगा। - डॉ. कुलदीप गुप्ता, अध्यक्ष, जूनियर डाक्टर एसोसिएशन, भोपाल

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