डिजिटल डेस्क, भोपाल। पेंच टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र स्थित तोतलादोह जलाशय में कथित अवैध मछली शिकार और संगठित कारोबार की शिकायत को केंद्र सरकार ने गंभीरता से लिया है। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) तक पहुंची शिकायत के बाद नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) ने मध्य प्रदेश सरकार से इस मामले में एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) मांगी है।
एनटीसीए ने प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं मुख्य वन्यजीव वार्डन को शिकायत की गंभीरता से जांच कर अवैध गतिविधियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सुप्रीम कोर्ट के प्रतिबंध के बावजूद पेंच नदी और तोतलादोह जलाशय के कोर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर मछली का अवैध शिकार किया जा रहा है।
शिकायतकर्ता ने इसे संगठित सिंडिकेट बताते हुए आरोप लगाया है कि इसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हैं और मछलियों को मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा व सिवनी के रास्ते महाराष्ट्र के बाजारों तक भेजा जाता है।
डायनामाइट से मछली शिकार का आरोप
छिंदवाड़ा निवासी कैप्टन ब्रजेश भारद्वाज की ओर से पीएमओ को भेजी गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मछली पकड़ने के लिए जलाशय में डायनामाइट जैसे विस्फोटकों का इस्तेमाल किया जाता है।
शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि अवैध शिकार रोकने पहुंचने वाले वन विभाग के गश्ती दल और विशेष बाघ सुरक्षा बल के सदस्यों पर फायर बम और बंदूकों से हमले किए जाते हैं।
शिकायत में हाल में वनकर्मियों की नावों को आग लगाए जाने की घटना का भी उल्लेख किया गया है। इस पूरे मामले में एनटीसीए ने प्रदेश से पूर्व में की गई कार्रवाई और वर्तमान स्थिति की जानकारी मांगी है।
सैकड़ों करोड़ के कारोबार का दावा
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि तोतलादोह में अवैध मछली कारोबार अब संगठित सिंडिकेट का रूप ले चुका है और इसका वार्षिक कारोबार सैकड़ों करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। आरोप के मुताबिक, बफर क्षेत्र के आसपास के कुछ गांवों से बड़ी संख्या में लोग शाम के समय कोर क्षेत्र में प्रवेश करते हैं और रातभर मछली पकड़ने के बाद सुबह के समय इसे बाहर निकालते हैं।
शिकायत में दावा किया गया है कि मछलियों को छिंदवाड़ा और सिवनी के रास्ते महाराष्ट्र के नागपुर, सावनेर और खापा के बाजारों में भेजा जाता है। इसके लिए पिकअप, बोलेरो, वैन और अन्य वाहनों के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया गया है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
145 मछुआरा परिवारों के पुनर्वास का भी उल्लेख
शिकायत में सरकारी रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा गया है कि पेंच नेशनल पार्क के गठन से पहले क्षेत्र में मछुआरा परिवारों के अधिकारों का निपटारा किया गया था। वर्ष 2001-02 में छिंदवाड़ा कलेक्टर के माध्यम से 145 पात्र मछुआरा परिवारों का विस्थापन और पुनर्वास किया गया था।
इनके पुनर्वास एवं मुआवजे के लिए करीब 72 लाख रुपये वितरित किए जाने का उल्लेख है। कुछ मछुआरों को वन विभाग में रोजगार दिए जाने की बात भी शिकायत में कही गई है।
जलीय जैव-विविधता पर खतरे की आशंका
तोतलादोह जलाशय पेंच के महत्वपूर्ण जलीय पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा है। यहां मछलियों के अलावा मगरमच्छ, कछुए और विभिन्न प्रजातियों के जलपक्षी पाए जाते हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अवैध गतिविधियों के कारण जलाशय में प्लास्टिक कचरा बढ़ रहा है और नावों की आवाजाही के लिए पानी में मौजूद सूखे पेड़ों को हटाया जा रहा है।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कोर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर मानवीय गतिविधियां और अवैध शिकार जारी रहता है तो इसका असर जलीय जैव-विविधता के साथ बाघों के प्राकृतिक आवास पर भी पड़ सकता है।
कोर क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक
पेंच नेशनल पार्क के कोर क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर केंद्र सरकार पहले भी अपना रुख स्पष्ट कर चुकी है। संसद में उठे एक प्रश्न के जवाब में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से कहा गया था कि वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत नेशनल पार्क के कोर क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति नहीं है।
केंद्र ने पेंच नेशनल पार्क की सीमाओं में बदलाव अथवा मछली पकड़ने पर लगाए गए प्रतिबंध को हटाने के किसी प्रस्ताव से भी इनकार किया था।
अब एनटीसीए की रिपोर्ट पर नजर
एनटीसीए की ओर से एटीआर मांगे जाने के बाद अब मध्य प्रदेश वन विभाग को शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच और अब तक की गई कार्रवाई का ब्योरा देना होगा। रिपोर्ट के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि तोतलादोह जलाशय के कोर क्षेत्र में अवैध मछली शिकार की शिकायतों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई और आगे इसे रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।