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बाघ-मानव के बीच संषर्ष ने चिंता में डाला, एमपी में जनवरी से अब तक 45 बाघ और 50 ग्रामीणों की मौत

अब संघर्ष क्षेत्र का दायरा बढ़ रहा है। ये वे इलाके हैं जहां मानव बस्तियां, खेत, राजमार्ग, रेलवे लाइनें और वन्यजीवों की आवाजाही आपस में टकरा रहे हैं।

By Digital DeskEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Tue, 11 Aug 2026 02:02:23 PM (IST)Updated Date: Tue, 11 Aug 2026 02:02:23 PM (IST)
बाघ-मानव के बीच संषर्ष ने चिंता में डाला, एमपी में जनवरी से अब तक 45 बाघ और 50 ग्रामीणों की मौत
बाघ इलाके से खदेड़ते हैं, तो लंबी दूरी तय करते हुए खेतों, रिहायशी इलाकों और बस्तियों तक पहुंच जाते हैं।

HighLights

  1. यह स्थिति जमीनी स्तर पर हो रही है बेहद खतरनाक
  2. गंभीर दोहरे संकट का सामना कर रहा है मध्य प्रदेश
  3. बाघों की आबादी बढ़ने से ग्रामीण आजीविका पर खतरा

नईदुनिया, डिजिटल डेस्क, जबलपुर। एमपी बाघों और तेंदुओं की अधिक संख्‍या के लिए जाना जाता है, लेकिन लगभग एक वर्ष के दौरान वन्‍य प्राण और मानव के बीच हो रहे संषर्ष ने चिंता में डाल दिया है। जंगल की सीमा से लगे गांवों में बसे ग्रामीण अक्‍सर महुआ, जलाऊ लकड़ी, तेंदु पत्‍ता बीनने या शौच अथवा मवेशियों को चराने के लिए जाते हैं। इसी वर्ष जनवरी से अब तक पूरे एमपी में करीब 50 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 45 बाघों की मौत का आंकड़ा पार कर रहा है।

आमना-सामना होने का खतरा

वन विभाग के अधिकारी का कहना है कि बाघों के हमले में ग्रामीणों की मौत हुई हैं। बाघों के अलावा जंगली सुअरों, हाथियों, भालू, तेंदुए के हमले में जान गई है। गर्मी के दिनों में बड़ी संख्या में ग्रामीण, आदिवासी समुदाय जंगलों में जाते हैं, जिससे उनका वन्यजीवों से आमना-सामना होने का खतरा काफी बढ़ जाता है।


हाथ में जानजान लेकर जाते हैं जंगल

नरसिंपुर, मंडला, डिंडौरी, कटनी आदि जिलों में भी हाथ में जान लेकर जंगल जाते हैं, जहां सबसे ज्‍यादा मौतें हुई हैं। यह क्षेत्र है रुडयार्ड किपलिंग की मशहूर किताब द जंगल बुक के मोगली की दुनिया को प्रेरित किया था। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व और आसपास के इलाकों में दर्ज की गईं, जहां बाघों का घनत्व सबसे ज्यादा है।

बाघों की भी लगातार हो रही मौत

संकट का एक दूसरा पहलू भी है। 2026 के शुरुआती 8 महीनों में मध्य प्रदेश में 45 से ज्यादा बाघों की भी जान जा चुकी है। इनकी मौत प्राकृतिक कारणों, आपसी लड़ाई, सड़क या रेल हादसों, करंट लगने और शिकार के कारण हो रही है।

आनाज खाने के साथ ही करते हैं लोगों पर हमला

छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे पूर्वी जिलों अनूपपुर, सीधी, शहडोल, डिंडौरी, रीवा, कटनी, उमरिया में सबसे ज्‍यादा हाथियों की आवक है। ग्रामीणों के घरों में आनाज और खेतों में फसलों को नुकसान पहुंचते हैं। आनाज खाने के साथ ही लोगों पर हमला करते हैं।

भाजपा सरकार ने दिए 20.05 करोड़ रुपये मुआवजा

भाजपा सरकार ने पांच साल में मानव मृत्यु और पशुओं के नुकसान के मुआवजे के रूप में 88.38 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया है। अकेले 2024-25 में यह आंकड़ा 20.05 करोड़ रुपये को पार कर गया। वर्ष 2022 में हुई राष्ट्रीय गणना पर नजर डालें तो प्रदेश 785 बाघ रहे, अधिकारियों और विशेषज्ञों की मानें तो बाघों की संख्या अब 980 है।

...तो रिहायशी इलाकों और बस्तियों तक पहुंच जाते हैं

वयस्क नर बाघ लगभग 50 से 100 वर्ग किलोमीटर के दायरे को अपना ठिकाना बनाता है। आपसी संषर्ष में ताकतवर बाघ इलाके से खदेड़ते हैं, तो लंबी दूरी तय करते हुए खेतों, रिहायशी इलाकों और बस्तियों तक पहुंच जाते हैं।

क्‍या कहते हैं वन विभाग के आंकड़े

2020-21 से 2024-25 के बीच मध्य प्रदेश में जंगली जानवरों के हमलों में 406 लोग मारे गए हैं। इस दौरान 5,804 लोग घायल हुए और पशुओं के शिकार के 72,627 मामले दर्ज किए गए।

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