मप्र विधानसभा में गरमाएगा 27% ओबीसी आरक्षण का मुद्दा; कांग्रेस ला सकती है संकल्प, अध्यादेश की मांग
शीतकालीन सत्र में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का मुद्दा उठ सकता है। कांग्रेस विधायक दल केंद्र सरकार से इसके लिए आवश्यक प्रावधान करने की मांग वाला संकल्प प्रस्तुत कर सकता है।
Publish Date: Fri, 30 Oct 2026 02:36:44 PM (IST)Updated Date: Fri, 30 Oct 2026 02:36:44 PM (IST)
प्रतीकात्मकHighLights
- विधानसभा में संकल्प ला सकती है कांग्रेस
- ओबीसी महासभा ने उमंग सिंघार को लिखा पत्र
- आरक्षण की लड़ाई सड़क से सदन तक लड़ने की तैयारी
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। दिसंबर में होने वाले मध्य प्रदेश के विधानसभा के शीतकालीन सत्र में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का मुद्दा उठेगा। कांग्रेस विधायक दल की ओर से यह संकल्प प्रस्तुत किया जा सकता है कि भारत सरकार ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए आवश्यक प्रविधान करे।
ओबीसी महासभा भी इसकी मांग कर रही है। उसने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार से पत्र लिखकर मांग की है कि वह इससे संबंधित निजी विधेयक या संकल्प प्रस्तुत करें।
कोर्ट में है मामला
कमल नाथ सरकार ने वर्ष 2019 में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को सरकारी नौकरियों में दिया जाने वाला 14 प्रतिशत आरक्षण बढ़ाकर 27 प्रतिशत कर दिया था। इसे संविधान द्वारा निर्धारित 50 प्रतिशत की सीमा से अधिक आरक्षण होने के आधार पर कोर्ट में चुनौती दी गई।
मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और सभी याचिकाओं को हाई कोर्ट जबलपुर एक साथ सुनवाई के लिए भेज दिया गया। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने इसी वर्ष नौ अक्टूबर को 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के प्रावधान को असंवैधानिक करार देते हुए रद कर दिया।
कांग्रेस की तैयारी
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में 27 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए विशेष अनुमति याचिका दायर की मगर कमियों के कारण इसे स्वीकार नहीं किया। उधर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने स्पष्ट किया कि ओबीसी आरक्षण की लड़ाई सड़क से लेकर सदन तक लड़ी जाएगी।
पार्टी पहले ही सरकार को ओबीसी के हित में सहयोग देने की घोषणा कर चुकी है। इसके बाद भी कोई ठोस पहल नहीं होती है तो फिर पार्टी कानूनी कदम उठाने से लेकर विधानसभा के मंच का उपयोग भी करेगी।
मुख्यमंत्री से भी मांग कर सकता है संगठन
ओबीसी महासभा सहित अन्य संगठनों का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भी 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के लिए नया अध्यादेश या फिर विधायी प्रस्ताव तैयार करने की मांग कर सकता है।
महासभा की कोर कमेटी के सदस्य लोकेंद्र गुर्जर का कहना है कि अध्यादेश लाया जाए और शीतकालीन सत्र में विधेयक लाकर प्रविधान किए जाएं।