MP OBC Reservation: कांग्रेस की मांग- 'संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल हो ओबीसी आरक्षण'; राज्यपाल व CM को लिखा पत्र
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को संविधान की नौवीं अनुसूची में...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 18 Oct 2026 09:09:38 AM (IST)Updated Date: Sun, 18 Oct 2026 09:09:38 AM (IST)
प्रतीकात्मक, एआई से तैयार तस्वीर।HighLights
- ओबीसी आरक्षण नौवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग
- नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्यपाल व CM को लिखा पत्र
- कमल नाथ ने भाजपा सरकार पर साधा निशाना
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के मुद्दे पर राजनीति तेज हो गई है। कांग्रेस ने अब ओबीसी आरक्षण को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग उठाई है।
पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने भाजपा सरकार पर अदालतों में कमजोर पैरवी का आरोप लगाया है। वहीं, भाजपा ने कमल नाथ सरकार के कार्यकाल में आरक्षण कानून की तैयारी पर सवाल उठाए हैं।
उमंग सिंघार ने लिखा पत्र
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर कहा है कि 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण पर उच्च न्यायालय के निर्णय और मौजूदा कानूनी स्थिति को देखते हुए ठोस कदम उठाया जाए।
इसे संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल कराने की संभावनाओं पर विचार किया जाना चाहिए। इस अनुसूची में केंद्र और राज्यों के ऐसे कानून शामिल हैं, जिन्हें अदालतों में चुनौती नहीं दी जा सकती।
वहीं पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने पिछले सात वर्षों में अदालतों में प्रभावी पैरवी नहीं की। ओबीसी आबादी के प्रमाणिक आंकड़े सुप्रीम कोर्ट में पेश किए जाएं और आरक्षण बचाने के लिए पूरी तैयारी के साथ कानूनी लड़ाई लड़ी जाए। कांग्रेस सहयोग के लिए तैयार है।
कांग्रेस सरकार ने नहीं की पर्याप्त तैयारी
भाजपा वहीं, भाजपा प्रदेश प्रवक्ता डॉ. हितेष वाजपेयी ने प्रदेश में कांग्रेस की कमल नाथ सरकार के 2019 के अध्यादेश और संशोधन कानून पर सवाल उठाए। कहा कि ओबीसी आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर सरकार ने पर्याप्त विधिक तैयारी और स्पष्टता क्यों सुनिश्चित नहीं की।
वाजपेयी ने यह भी कहा कि सामाजिक न्याय के मुद्दे पर सरकारों की जवाबदेही उनके फैसलों और कानूनी आधार से तय होती है। सामान्य निर्धन वर्ग के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण लागू करने में भी देरी की गई।