मध्य प्रदेश में अपना 27 फीसदी आरक्षण लेकर रहेगा ओबीसी, अपना दल के मप्र प्रभारी आरबी सिंह पटेल ने कहा
आर बी सिंह पटेल ने कहा कि आरक्षण कोई सरकार की कृपा नहीं, बल्कि ओबीसी समाज का संवैधानिक अधिकार है। मध्य प्रदेश में ओबीसी वर्ग की आबादी लगभग 58 प्रतिशत ...और पढ़ें
Publish Date: Sat, 17 Jan 2026 08:35:31 PM (IST)Updated Date: Sat, 17 Jan 2026 08:38:24 PM (IST)
ओबीसी आरक्षण।HighLights
- मप्र में ओबीसी वर्ग की आबादी लगभग 58 प्रतिशत है।
- इस वर्ग को यदि उसका वैधानिक आरक्षण नहीं मिलेगा।
- तो सामाजिक न्याय की अवधारणा अधूरी रह जाएगी।
भोपाल 17/01/26। ओबीसी वर्ग को मध्य प्रदेश में उसके संवैधानिक अधिकार से वंचित किए जाने का आरोप लगाते हुए अपना दल (एस) के राष्ट्रीय महासचिव एवं मध्य प्रदेश प्रभारी आर बी सिंह पटेल ने प्रदेश सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार कागजों में तो ओबीसी वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण दर्शाती है, लेकिन व्यवहार में केवल लगभग 86 प्रतिशत सीटों पर ही नियुक्तियां की जा रही हैं, जबकि शेष 14 प्रतिशत सीटों को होल्ड कर रखा गया है। यह स्थिति ओबीसी समाज के साथ अन्याय और भेदभावपूर्ण है।
आर बी सिंह पटेल ने कहा कि आरक्षण कोई सरकार की कृपा नहीं, बल्कि ओबीसी समाज का संवैधानिक अधिकार है। मध्य प्रदेश में ओबीसी वर्ग की आबादी लगभग 58 प्रतिशत है। इतनी बड़ी आबादी वाले वर्ग को यदि उसका वैधानिक आरक्षण नहीं मिलेगा, तो सामाजिक न्याय की अवधारणा अधूरी रह जाएगी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ओबीसी समाज किसी अन्य वर्ग का अधिकार नहीं छीन रहा है, बल्कि केवल अपने हक की मांग कर रहा है।
उन्होंने प्रदेश की मोहन सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार का रवैया यह दर्शाता है कि वह ओबीसी को पूर्ण 27 प्रतिशत आरक्षण देने के मूड में नहीं है। सरकारी भर्तियों में बार-बार नियमों का हवाला देकर सीटों को रोका जाना ओबीसी युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। इससे न केवल रोजगार के अवसर सीमित हो रहे हैं, बल्कि सामाजिक असंतोष भी बढ़ रहा है।
आर बी सिंह पटेल ने मुख्यमंत्री से सीधा आग्रह करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले में राज्य सरकार तत्काल स्पष्ट और मजबूत एफिडेविट दाखिल करे, जिससे ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण का रास्ता साफ हो सके। उन्होंने कहा कि यदि सरकार की मंशा साफ है तो उसे कानूनी स्तर पर मजबूती से ओबीसी वर्ग का पक्ष रखना चाहिए।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ओबीसी समाज को उसका पूरा आरक्षण नहीं मिला, तो यह मुद्दा केवल कानूनी नहीं रहेगा, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक आंदोलन का रूप भी ले सकता है। ओबीसी वर्ग अपना 27 प्रतिशत आरक्षण लेकर रहेगा और इसके लिए हर संवैधानिक व लोकतांत्रिक लड़ाई लड़ी जाएगी।