MP में बड़ा फर्जीवाड़ा! मंत्री प्रतिमा बागरी ही नहीं, 500 से ज्यादा बड़े अफसर भी जाति प्रमाण पत्र के विवाद में घिरे; 7000 केस पेंडिंग
राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र विवाद के बीच राज्य स्तरीय छानबीन समिति के पास पिछले 15 वर्षों से करीब 7,000 मामले लंबित हैं, जिनमें 500...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 03 Jul 2026 04:25:10 PM (IST)Updated Date: Fri, 03 Jul 2026 04:25:10 PM (IST)
राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी। फाइल फोटो।HighLights
- राज्य स्तरीय छानबीन समिति के पास पिछले 15 वर्षों से करीब 7,000 मामले लंबित हैं
- राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के साथ ही 500 से अधिक क्लास-1 और क्लास-2 अधिकारियों के प्रकरण शामिल हैं
- राज्य मंत्री गौतम टेटवाल, पूर्व सांसद ज्योति धुर्वे और पूर्व विधायक जजपाल जज्जी के मामले भी सामने आ चुके हैं
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। नगरीय विकास एवं आवास विभाग की राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र का मामला चर्चा में है। छह जुलाई को उन्हें छानबीन समिति के सामने प्रस्तुत होना है, लेकिन, मध्य प्रदेश में यह कोई अकेला मामला नहीं है।
वर्तमान में राज्य मंत्री गौतम टेटवाल का मामला भी हाई कोर्ट तक पहुंचा था। वर्ष 2015 में एससी मामलों की राज्य स्तरीय छानबीन समिति ने उनके जाति प्रमाण पत्र को सही बताया था। इसके बाद शिकायतकर्ता ने हाई कोर्ट में याचिका प्रस्तुत की, जिसे कोर्ट ने यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया है छानबीन समिति में पहले ही निर्णय हो चुका है। इस बीच कई वर्ष तक यह मामला चर्चा में बना रहा।
7000 केस पेंडिंग
टेटवाल के मामले में शिकायत थी कि उनकी जाति जीनगर ओबीसी में आती है, लेकिन अनुसूचित जाति वर्ग के लिए सुरक्षित सारंगपुर सीट से 2008 में चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। राज्य स्तरीय छानबीन समिति के पास 15 वर्षों में लगभग 7,000 केस लंबित हैं, इनमें करीब 500 क्लास एक और दो के हैं। विधानसभा के बजट सत्र में कांग्रेस विधायक हीरालाल अलावा ने भी यह मुद्दा उठाया था।
उधर, सुनवाई में देरी को लेकर विभाग के अधिकारी कहते हैं कि अधिकतर मामले एसटी वर्ग के हैं। सप्ताह में सिर्फ एक दिन सुनवाई की जाती है। उसमें भी पांच मामले ही सुने जाते हैं। इसी तरह से एक दिन एससी के लिए रखे गए हैं। नेताओं के जाति प्रमाण पत्र के संदिग्ध होने का मामला उनके चुनाव लड़ने के बाद सामने आया। उसके पहले दबा रहा।
दो कार्यकाल पूरा होने के बाद पता चला कि जाति प्रमाण-पत्र वैध नहीं
अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए सुरक्षित बैतूल विधानसभा सीट से वर्ष 2009 और 2014 में लोकसभा सदस्य रहीं ज्योति धुर्वे का गोंड जाति प्रमाण पत्र अवैध होने का आरोप लगाते हुए उनके विरुद्ध चुनाव लड़ने वाले कांग्रेस उम्मीदवार ओझाराम इवने ने हाई कोर्ट में याचिका लगाई थी।
हाई कोर्ट के निर्देश पर उच्चस्तरीय छानबीन समिति ने मामले की जांच की थी, जिसमें उनका प्रमाण पत्र अवैध पाया गया था। इसके बाद उन्होंने छानबीन समिति के समक्ष रिव्यू करने की अपील की, पर उसमें भी उन्हें राहत नहीं मिली। इस बीच लोकसभा सदस्य के रूप में उनके दो कार्यकाल पूरे हो गए। उनका जाति प्रमाण पिता की जगह पति की जाति के आधार पर बना था।
पूर्व विधायक जजपाल जज्जी का मामला, डबल बेंच से मिली राहत
जजपाल जज्जी ने एससी के लिए सुरक्षित अशोकनगर सीट से वर्ष 2018 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था। विधायक बनने पर उनके जाति प्रमाण पत्र पर सवाल उठे। हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने उनके अनुसूचित जाति (नट) होने का प्रमाण पत्र को खारिज कर दिया था। अगस्त 2023 में डबल बेंच से राहत मिली थी।