• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • AI बूटकैंप
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • गणेशोत्‍सव 2026
  • हनुमान अंश
  • Mutual Funds मास्टरी
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • मानसून
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • भोपाल

एमपी के कई अधिकारियों के खिलाफ जारी हैं अदालतों के गिरफ्तारी वारंट, कलेक्टर्स से लेकर सचिव तक लिस्ट में शामिल

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अवमानना के एक मामले में पन्ना कलेक्टर उषा परमार के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर उन्हें 30 सितंबर को अदालत में प्रस्तुत होने...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Wed, 23 Sep 2026 09:17:45 PM (IST)Updated Date: Wed, 23 Sep 2026 09:17:45 PM (IST)
एमपी के कई अधिकारियों के खिलाफ जारी हैं अदालतों के गिरफ्तारी वारंट, कलेक्टर्स से लेकर सचिव तक लिस्ट में शामिल
एमपी के कई अधिकारियों के खिलाफ जारी हैं अदालतों के गिरफ्तारी वारंट

HighLights

  1. पन्ना कलेक्टर उषा परमार के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी
  2. कोर्ट ने 30 सितंबर को कलेक्टर को पेश होने का दिया आदेश
  3. अदालती अवमानना पर कई IAS अधिकारियों पर गिर चुकी है गाज

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अवमानना के एक मामले में पन्ना कलेक्टर उषा परमार के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर उन्हें 30 सितंबर को अदालत में प्रस्तुत होने का आदेश दिया है। उषा परमार अकेली अधिकारी नहीं हैं, जिनके खिलाफ हाई कोर्ट ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया है।

प्रदेश में ऐसे कई अधिकारी हैं, जिनके विरुद्ध अवमानना के मामले विभिन्न अदालतों में चल रहे हैं। यह स्थिति तब है जब सरकार स्पष्ट कर चुकी है कि अवमानना की स्थिति नहीं बननी चाहिए। समय पर जवाब-दावा दाखिल किए जाएं और संबंधित अधिकारी को प्रकरण की पूरी जानकारी दें ताकि ऐसी स्थिति न बने।


जीएडी के निर्देशों के बावजूद लगातार बन रहे अवमानना के प्रकरण

प्रदेश में लगातार अधिकारियों के विरुद्ध न्यायालय में अवमानना के प्रकरण बन रहे हैं। कई मामलों में मुख्य सचिव, अपर मुख्य सचिव को भी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने के आदेश दिए जा चुके हैं। इसे लेकर सामान्य प्रशासन विभाग ने निर्देश दिए थे कि आगे ऐसी स्थिति नहीं बननी चाहिए। प्रभारी अधिकारी का दायित्व रहेगा कि वह प्रकरण से जुड़ी सभी जानकारियों से उच्चाधिकारियों को अवगत कराएं।

कुछ समय पूर्व ही पूर्व में तत्कालीन प्रमुख सचिव राजस्व विवेक पोरवाल और सागर के तत्कालीन कलेक्टर संदीप जीआर के खिलाफ भी गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए थे। इससे पहले भी कर्मचारियों के वेतनमान, पेंशन और नियमितीकरण से जुड़े पुराने मामलों में समय सीमा बीत जाने के बाद कोर्ट ने रीवा संभाग के कमिश्नर और रीवा कलेक्टर के खिलाफ जमानती और गैर-जमानती वारंट जारी किए थे, जिसके बाद अधिकारियों ने आनन-फानन में कोर्ट के आदेश का पालन सुनिश्चित किया था।

न्यायालयीन प्रकरणों में गंभीरता न दिखाने और ट्रिब्यूनल के बंद होने से बिगड़े हालात

न्यायालयीन प्रकरणों में गंभीरता न दिखाने के कारण बनती है स्थिति। सामान्य प्रशासन विभाग के पूर्व सचिव डीएस राय का कहना है कि सामान्यत: वरिष्ठ अधिकारी न्यायालयीन प्रकरणों को नहीं देखते हैं। जो प्रभारी अधिकारी नियुक्त किया जाता है वह ही पूरे प्रकरण को देखता है।

समय-समय पर वरिष्ठ अधिकारी को प्रकरण की अद्यतन स्थिति से अवगत कराते हैं लेकिन जब इसमें लापरवाही होती है तो फिर अवमानना और व्यक्तिगत उपस्थिति की स्थिति बनती है। इसका एक कारण यह भी है कि कर्मचारियों की सुनवाई करने वाली बीच की कड़ी समाप्त हो गई है। पहले राज्य प्रशासनिक अधिकरण हुआ करता था। यहां कर्मचारी से जुड़े अधिकतर मामलों का निराकरण हो जाता था और न्यायालय जाने की आवश्यकता केवल नीतिगत मामलों में बनती थी।

यह भी पढ़ें- इंदौर में डिजिटल भुगतान पर शुल्क लागू करने का हुआ विरोध, दुकानों से हटाए यूपीआई क्यूआर कोड