
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : अगले माह से यूपीआई ट्रांजेक्शन पर लागू हो रहे शुल्क (एमडीआर) का पहला विरोध आंदोलन बुधवार को इंदौर के बाजारों में दिखा। शहर के व्यापारियों ने विरोध स्वरुप नो यूपीआई-डे का ऐलान किया था।
थोक और खुदरा व्यापारियों ने ग्राहकों से यूपीआइ से भुगतान नहीं स्वीकारने की घोषणा की। सुबह दूध की दुकानों से लेकर प्रसाद और पोहा-जलेबी की स्टॉल पर दुकानदार नकद भुगतान देने का आग्रह करते दिखे। सुबह थोड़ी हड़बड़ाहट दिखी। दोपहर में स्थिति सामान्य हुई।
कई ग्राहक बिना नकदी के बाजार पहुंचे तो उनसे बाद में डिजिटल भुगतान भी स्वीकार किया। शहर के केंद्र राजवाड़ा के आसपास बसे पुराने थोक और खुदरा बाजारों के व्यापारियों ने सड़क पर उतरकर एमडीआर का विरोध किया।
राजवाड़ा क्षेत्र में नो यूपीआई डे का सबसे ज्यादा असर नजर आया। शहर के सबसे बड़े और पुराने बाजार इसी क्षेत्र में है। सराफा बाजार, मारोठिया बाजार, एमटी क्लाथ मार्केट, सीतलामाता बाजार, सांठा बाजार, बजाजखाना क्षेत्र के व्यापारियों ने यूपीआइ पर लग रहे शुल्क के विरोध में रैली भी निकाली।
नो यूपीआई-डे का सख्ती से पालन रिटेल रेडीमेड गारमेंट एसोसिएशन ने किया। दुकानों पर यूपीआइ से भुगतान स्वीकार करने पर पूरी तरह रोक लगा दी। राजवाड़ा क्षेत्र की कपड़ा दुकान के काउंटरों पर मौजूद यूपीआइ क्यूआर को़ड के स्कैनर को हटाकर एसोसिएशन ने कब्जे में ले लिया। शहर के कम से कम आधे पेट्रोल पंपों पर भी यूपीआइ से भुगतान लेने से मना कर दिया गया।
थोक व्यापार में नो यूपीआइ डे का कोई खास असर नहीं दिखा। व्यापारियों के अनुसार ज्यादातर भुगतान एनफटीई और नेट बैंकिंग जैसे माध्यमों से होने के कारण यूपीआइ के बहिष्कार आंदोलन से थोक बाजार अप्रभावित ही रहे। व्यापारियों ने मांग की कि ये आंदोलन का पहला चरण है।सरकार नहीं मानी तो व्यापारी आगे भी विरोध करेंगे।अभी सांकेतिक बहिष्कार सिर्फ एक दिन का है। आगे यूपीआइ क्यूआर कोड पूरी तरह हटा दिए जाएंगे।
छोटा भुगतान एमडीआर से अप्रभावित रहेगा इसके बाद भी चाय, नाश्ता, दूध की दुकान लगाने वाले व्यापारी भी नो यूपीआइ डे में शामिल दिखे। कई जगह नाश्ते और दूध की दुकानों पर सुबह से यूपीआई से भुगतान नहीं लिया गया। ग्राहकों से नकद देने को कहा गया। नियमित ग्राहक जो नकद लेकर नहीं आए उनसे बाद में पैसा लेने की बात दुकानदारों ने कही। शेष ग्राहकों से बाद में डिजिटल भुगतान स्वीकार कर लिया गया।
टाइल्स-सेनेटरी की दुकानों पर अच्छा असर दिखा। यहां ज्यादातर दुकानों ने आनलाइन भुगतान से परहेज किया। दुकानदारों ने कहा कि अभी सिर्फ लोगों को समझाया जा रहा है कि अगले महीने से यूपीआइ भुगतान का पूरी तरह बहिष्कार किया जा सकता है। ऐसे में इस तरह के आंदोलन से धीरे-धीरे लोगों को नकद भुगतान के लिए तैयार करने का मौका भी मिल रहा है।
यूपीआइ भुगतान पर लागू शुल्क के विरोध में एक जुट हुए व्यापारी इसमें आगे के लिए लाभ देखने लगे हैं। व्यापारियों के अनुसार यूपीआइ पर शुल्क लगता है तो नकद व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। बीते दिनों में यूपीआइ से भुगतान के कारण ट्रांजेक्शन की संख्या भी बढ़ रही है। ऐसे में जीएसटी से लेकर इनकम टैक्स तक के नोटिस भी लगातार आने लगे हैं। आगे नकदी प्रवाह से ऐसी सरकारी परेशानियों से मुक्ति मिलेगी।
प्रदेश के चार प्रमुख जिलों इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और उज्जैन में ही यूपीआई से सामान्य दिनों में 20 हजार करोड़ से ज्यादा का भुगतान होता है। अगस्त माह में चारों जिलों में कुल 25 हजार करोड़ रुपये के ट्रांजेक्शन हुए थे। अक्टूबर में त्यौहारी माह शुरू हो जाएगा। ऐसे में अक्टूबर में यूपीआइ से भुगतान का आंकड़ा 30 हजार करोड़ तक पहुंचने के आसार थे। अब शुल्क के दबाव और व्यापारियों के विरोध से आंकड़े में कमी की आशंका जताई जा रही है।
यूपीआइ भुगतान पर वसूला जा रहा शुल्क सरकार के खजाने में नहीं जाएगा। यह उन बैंकों को दिया जाएगा जिनसे पहले से व्यापारी परेशान है और वे अपनी गलत नीति और भ्रष्टाचार से एनपीए बढ़ा रहे हैं। उन बैंकों का बोझ व्यापारी और उपभोक्ता क्यों उठाएगा। ऐसे में हम शुल्क को स्वीकार नहीं करेंगे। सरकार को इसे वापस लेना होगा। - रमेश खंडेलवाल, अध्यक्ष अहिल्या चेंबर आफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज