
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। भोपाल के राजा भोज एयरपोर्ट पर अत्याधुनिक कैटेगरी-2 इंस्टूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आईएलएस) की स्थापना के साथ ही अचानक मौसम खराब होने एवं कोहरा बढ़ने के कारण उडानें लेट होने की समस्या पर ब्रेक लग गया है। पिछले दिसंबर-जनवरी माह में आमतौर पर उड़ानें या तो लेट होती रही हैं या फिर भी भोपाल आ रही उड़ानों को पास के एयरपोर्ट पर डायवर्ट करना पड़ा है पर इस बार एक भी उड़ान डायवर्ट नहीं हुई है।
एयरपोर्ट अथारिटी पिछले तीन साल से मौसम उपकरण अपग्रेड करने का प्रयास कर रही थी। रनवे से लगी कुछ जमीन सेना की है। इस जमीन पर उपकरण स्थापना नहीं हो पा रही थी। मामला सुलझने के बाद अथारिटी ने नए सिस्टम अपग्रेड किया। इसका उपयोग भी शुरू हो गया है। इसकी स्थापना से 350 मीटर तक दृश्यता होने पर भी विमान लैंड हो रहे हैं।
इसके पहले केटेगरी-1 सिस्टम लगा था, इस सिस्टम की मदद से 550 मीटर से कम विजिब्लिटी होने पर विमानों को पास के किसी एयरपोर्ट पर डायवर्ट कर देना पड़ता था। इस बार भोपाल विमान क्षेत्र से गुजर रही तीन उड़ानें डायवर्ट होकर यहां उतरीं जो दूसरे शहर की ओर जा रही थीं।
केटेगरी-2 आईएसएल सिस्टम वर्तमान में अमृतसर एवं कोलकात्ता में यह सिस्टम स्थापित है। भोपाल देश का तीसरा एवं प्रदेश का पहला एयरपोर्ट है जहां इसकी स्थापना की गई है। स्थापना से पहले कर्मचारियों को जरूरी प्रशिक्षण दिया गया है । नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) से औपचारिक अनुमति मिलने के बाद नया सिस्टम काम करने लगा है। अब अपग्रेड सिस्टम का उपयोग प्रभावी ढंग से हो रहा है।
एयरपोर्ट पर स्वचलित मौसम अवलोकन प्रणाली (एडब्ल्यूओएस) भी स्थापित की गई थी। इसकी स्थापना से मौसम खराब होने पर पायलटों को तत्काल कोहरे, वर्षा या आंधी चलने की जानकारी मिल जाती है। मानसून में भी सुरक्षित लैंडिंग हो सकती है।
भोपाल में इस माह की शुरूआत के साथ ही सुबह के समय कोहरा छा रहा है। लो विजिब्लिटी के कारण देश भर में हवाई यातायात पर असर पड़ा है लेकिन हमारे यहां नया आईएलएस सिस्टम स्थापित होने से एक भी उड़ान निरस्त नहीं हुई। यदि सिस्टम न होता तो कम से कम 10 उड़ानें निरस्त करनी पड़तीं। कुछ उड़ानें देर गंतव्य से ही देर से टेकआफ होने के कारण विलंब से पहुंच रही हैं- रामजी अवस्थी, एयरपोर्ट डायरेक्टर