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21 साल बाद भोपाल के नए मास्टर प्लान का रास्ता साफ, सुप्रीम कोर्ट ने दी ड्राफ्ट की मंजूरी, सीलिंग पर SC सख्त

21 साल से लंबित भोपाल मास्टर प्लान के नए ड्राफ्ट के प्रकाशन का रास्ता खुल गया। रहवासी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों और सीलिंग से जुड़े मामले की ...और पढ़ें

By anuj mainaEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Tue, 22 Sep 2026 06:21:14 PM (IST)Updated Date: Tue, 22 Sep 2026 06:21:14 PM (IST)
21 साल बाद भोपाल के नए मास्टर प्लान का रास्ता साफ, सुप्रीम कोर्ट ने दी ड्राफ्ट की मंजूरी, सीलिंग पर SC सख्त
21 साल बाद भोपाल के नए मास्टर प्लान का रास्ता साफ

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट ने नए भोपाल मास्टर प्लान के ड्राफ्ट को दिया मंजूरी
  2. फाइनल मास्टर प्लान जारी करने से पहले देनी होगी SC को रिपोर्ट
  3. आवासीय क्षेत्रों में अवैध दुकानों की सीलिंग पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। 21 साल से लंबित भोपाल मास्टर प्लान के नए ड्राफ्ट के प्रकाशन का रास्ता मंगलवार को खुल गया। रहवासी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों और सीलिंग से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को मास्टर प्लान का ड्राफ्ट जारी करने की अनुमति दे दी।

हालांकि, फाइनल मास्टर प्लान प्रकाशित करने से पहले इसकी जानकारी सर्वोच्च न्यायालय को देनी होगी। न्यायालय की अनुमति मिलने के बाद ही मास्टर प्लान का फाइनल प्रकाशन किया जा सकेगा।

फर्जीवाड़ा रोकने के लिए नगर निगम को दिए कड़ी कार्रवाई के निर्देश

सुनवाई के दौरान शीर्ष कोर्ट ने सीलिंग की कार्रवाई में लापरवाही की शिकायतों पर नाराजगी जताई और आदेशों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए। सील किए गए प्रतिष्ठानों के सुबह बंद और शाम को दोबारा खुलने की शिकायतों पर भी कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया। सुनवाई से पहले रहवासियों की ओर से ऐसी नौ शिकायतें प्रस्तुत की गई थीं। इसके बाद कोर्ट ने नगर निगम को सीलिंग की कार्रवाई प्रभावी ढंग से जारी रखने के निर्देश दिए। इस मामले में अब नई कमेटी गठित नहीं होगी।


62 हजार से ज्यादा प्रतिष्ठानों में से 8 हजार से अधिक को जारी हुए नोटिस

भोपाल में फिलहाल वर्ष 2005 के मास्टर प्लान के आधार पर विकास गतिविधियां संचालित हो रही हैं। करीब 21 साल से नया मास्टर प्लान लागू नहीं हो सका है। पांच अगस्त के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम ने आवासीय क्षेत्रों में संचालित प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए थे। सूचीबद्ध 62,500 प्रतिष्ठानों में से 8,084 को नोटिस दिए गए और इसके बाद 190 प्रतिष्ठानों को तीन दिन तक बंद कराया गया था। मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी। इस दौरान नगर निगम और सरकार को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।

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