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सोलर सिस्टम की ओर लोगों का रुझान बढ़ा, जेब पर बोझ घटा, बिजली बिल का भार हुआ कम

MP News: नगर में सोलर सिस्टम से तैयार बिजली का उपयोग करने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। नगर में पिछले 6 माह में 500 से ज्यादा सोलर सिस्टम भव...और पढ़ें

By Ajay JainEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sun, 30 Nov 2025 09:49:12 PM (IST)Updated Date: Sun, 30 Nov 2025 09:49:12 PM (IST)
सोलर सिस्टम की ओर लोगों का रुझान बढ़ा, जेब पर बोझ घटा, बिजली बिल का भार हुआ कम

HighLights

  1. सोलर सिस्टम लगवाने के लिए बढ़ी जागरूकता
  2. 500 से अधिक भवनों पर लग चुके सोलर सिस्टम
  3. कई ओर लगवाने की तैयारी में, बिल का भार कम

नईदुनिया न्यूज, गंजबासौदा। नगर में सोलर सिस्टम से तैयार बिजली का उपयोग करने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। नगर में पिछले 6 माह में 500 से ज्यादा सोलर सिस्टम भवनों पर लग चुके हैं। जबकि कई उपभोक्ता यह सिस्टम लगाने की तैयारी में हैं। घरेलू बिजली का भार काम करने लोग अपनी छतो पर अब सोलर सिस्टम लगवा रहे हैं। सब्सिडी का लाभ मिलने से उपभोक्ताओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इसके लिए कई लोगों ने रजिस्ट्रेशन करा लिए हैं। कुछ लोग रजिस्ट्रेशन साइट नहीं खुलने से परेशान हैं।

कई ग्राम पंचायतों में बिजली की समस्या

बासौदा ब्लॉक में लगभग दो दर्जन से ज्यादा किसान खेतों की सिंचाई के लिए सोलर बिजली का ही उपयोग कर रहे हैं। कई ग्राम पंचायतों में बिजली की समस्या है। ऐसे में पेयजल के लिए भी मोटर पंप सोलर से चलाए जा रहे हैं। यह बिजली उनके लिए सस्ती और सही साबित हो रही है। नगर में जिन भवनों में सोलर सिस्टम लगे हैं, वह दिन में अपनी बिजली का उपयोग कर रहे हैं। उपयोग से बचने वाली सप्लाई बिजली कंपनी को दे रहे हैं। रात को बिजली कंपनी की सप्लाई का उपयोग कर रहे हैं। इससे बिजली के बिल का भार कम हो गया है।


उपभोक्ताओं पर बिल का भार भी कम हो रहा

सोलर एनर्जी के लिए काम कर रहे राजकुमार रिछारिया ने बताया कि लगातार डिमांड बढ़ रही है प्रतिदिन एक से दो सिस्टम शहर में स्टॉल हो रहा है। आने वाले दिनों में इसकी संख्या साल के अंत तक छह सौ तक पहुंच सकती है। उपभोक्ताओं के लिए बिजली कंपनी से मीटर मिलने में देरी हो रही है। जिससे निर्धारित समय में सेटअप चालू करने में परेशानी आ रही है। यदि बिजली कंपनी डिमांड के अनुसार मीटर उपलब्ध कराए तो उपभोक्ताओं को और जल्दी इसका लाभ मिलेगा। बिजली वितरण कंपनी के ज ई पवन पंथी ने बताया कि शहरी क्षेत्र में सोलर सिस्टम की संख्या लगातार बढ़ रही है सब्सिडी मिलने से लोगों का रुझान बड़ा है। सोलर लगने से उपभोक्ताओं पर बिल का भार भी कम हो रहा है।

सब्सिडी से हुई आसानी

पहले सोलर सिस्टम काफी मंहगा आता था, लेकिन अब सरकार घर-घर सोलर सिस्टम लगाने की योजना पर कार्य कर रही है। इसके लिए सब्सिडी दे रही है। केंद्र सरकार द्वारा इसके लिए प्रोत्साहित भी किया जा रहा है। आनलाइन सिस्टम में ज्यादा रख रखाव की झंझट नहीं है। इसके चलते स्कूल, व्यापारिक व आवासीय भवन मालिकों का रुझान बढ़ा है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी इनका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।

दो प्रकार के सिस्टम, ऑनलाइन पर रुझान अधिक

दो प्रकार के सोलर सिस्टम चल रहे हैं। इनमें ऑनलाइन पर रुझान अधिक है। नागरिकों ने बताया कि दो प्रकार के सोलर सिस्टम प्रचलित हैं। आफ लाइन, दूसरा आन लाइन। ऑफलाइन में बैटरी सिस्टम होता है। इससे उर्जा स्टोर कर रात में उपयोग कर सकते हैं। यह सिस्टम महंगा पड़ता है। दूसरा ऑनलाइन सिस्टम, जिसमें दिन में जब तक सूर्य की रोशनी रहेगी तो वह काम करेगा। जो बिजली उपयोग से शेष रहेगी, उसे बिजली कंपनी को दे सकते हैं। रात में उतनी बिजली ले सकते हैं। इसके लिए बिजली कंपनी विशेष प्रकार का मीटर लगाती है। यह मीटर इन कमिंग और आउट गोइंग दोनों प्रकार की रीडिंग रखता है। सोलर सिस्टम के प्रति लोगों का रुझान बढ़ा है। बिजली कंपनी को भी बची बिजली दे रहे हैं। इसके लिए विशेष मीटर लगाया जाता है। उतनी राशि उपभोक्ता के बिल से कम हो जाती है।

एक्स्ट्रा बिजली देने की सुविधा

सोलर से एक्स्ट्रा बिजली देने की सुविधा है। उदाहरण के तौर पर मकान में यदि दो किलो वाट क्षमता का सोलर सिस्टम लगा है और बिजली की खपत डेढ़ किलो वाट की हो रही है, तो आधा किलो वाट बिजली बचने पर उसे बिजली कंपनी ले लेगी। जब ज्यादा सप्लाई की आवश्यकता होगी, तो कंपनी ली गई सप्लाई को घटाकर बिल भेजेगी। इससे आर्थिक बोझ कम होगा। इसके लिए बिजली कंपनी विशेष प्रकार का मीटर लगाती है। यह मीटर कंपनी से ली गई और दी गई बिजली खपत का हिसाब रखता है। उसी अनुसार आपको बिल मिलता है। यदि आपने बिजली उपयोग कम की है और दी गई बिजली ज्यादा है। तो वह राशि आपके खाते में डाल देगी।

कंपनी को सप्लाई कर रहे हैं सौर बिजली

बरेठ रोड स्थित एक निजी स्कूल का बिजली बिल हर महीने साठ से सत्तर हजार रुपया आता था। जब से स्कूल प्रबंधन ने सोलर सिस्टम का उपयोग शुरू किया है। अब उनको बिजली कंपनी के लिए पंद्रह से सत्रह हजार के बीच देना पड़ रहे हैं। दिन में वह सोलर सिस्टम से मिलने वाली बिजली का उपयोग करते हैं। उपयोग के बाद जितनी बिजली बचती है, वह बिजली कंपनी को सप्लाई कर देते हैं। सिस्टम का विस्तार कर इसे भी जीरो करने की तैयारी है।

राजेंद्र नगर निवासी धीरेंद्र राजपूत 1600 वर्गफीट में बने अपने पूरे परिसर को रोशन कर रहे हैं। खेत में सिंचाई के लिए पांच हार्स पावर की मोटर भी चला रहे हैं। अब तक नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में दो से पांच किलो वाट के सौ सिस्टम लग चुके हैं।

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एडवोकेट धीरज सिंह रघुवंशी ने बताया कि पहले उनका बिल 7000 से अधिक आता था जब से पांच किलोवाट का सोलर पेनल लगवाया है बिजली की बचत के साथ बिल जीरो हो गया है। कभी मेंटेनेंस चार्ज ही लगता है। करीब आधा दर्जन सोलर लगने की तैयारी में हैं। दिसंबर तक इनकी संख्या बढ़ कर छह सौ होने की संभावना है। शासकीय जन चिकित्सालय में सोलर सिस्टम पिछले आठ साल से लगा हुआ है। इसी तर्ज पर नगर के कई स्कूल भी इस सिस्टम को लगाने की तैयारी में हैं। इसका लाभ लगातार उपभोक्ता नगर में ले रहे हैं।