भोपाल: पढ़ाई के बहाने नाबालिग को कमरे में ले जाकर की थी गलत हरकत; दोषी को 5 साल की जेल
अभियोजन के अनुसार 11 नवंबर 2024 को आरोपी बालिका को पढ़ाई कराने के बहाने कमरे में ले गया था, जहां उसके साथ लैंगिक हमला किया गया। अगले दिन मां की शिकायत...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 17 Sep 2026 08:18:31 PM (IST)Updated Date: Thu, 17 Sep 2026 08:18:31 PM (IST)
प्रतीकात्मक फोटो।HighLights
- नाबालिग बालिका से लैंगिक हमला करने के मामले में फैसला
- आरोपी को पांच साल का सश्रम कारावास, पीड़िता को 1 लाख मुआवजा
- आरोपी ने बालिका को पढ़ाई के बहाने कमरे में ले जाकर की थी हरकत
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। नाबालिग बालिका को पढ़ाई कराने के बहाने कमरे में ले जाकर उसके साथ लैंगिक हमला करने वाले आरोपी को विशेष न्यायालय ने 5 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने आरोपी कुलदीप साहू पर 5 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
साथ ही पीड़िता के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उसे एक लाख रुपये प्रतिकर दिए जाने का आदेश पारित किया गया है।
यह फैसला गुरुवार को विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो अधिनियम) व पंद्रहवें अपर सत्र न्यायाधीश कुमुदिनी पटेल की अदालत ने सुनाया। शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक दिव्या शुक्ला और नवीन श्रीवास्तव ने मामले में पैरवी की।
पड़ोस में रहने वाला था आरोपी
अभियोजन के अनुसार घटना 11 नवंबर 2024 की है। पीड़िता अपनी मां और भाई के साथ रहती थी। घटना के दिन उसकी मां व नानी किसी काम से शमशाहाबाद गई थीं। शाम करीब चार बजे पीड़िता छत पर खेल रही थी।
इसी दौरान पड़ोस में रहने वाला आरोपी कुलदीप साहू वहां पहुंचा और पढ़ाई कराने की बात कहकर उसे अपने कमरे में ले गया। कमरे में उस समय कोई अन्य व्यक्ति नहीं था।
आरोप है कि आरोपी ने बालिका के कपड़े उतारकर उसके साथ गलत हरकत की और लैंगिक हमला किया। पीड़िता ने शोर मचाया और आरोपित को धक्का देकर वहां से भाग निकली। डर के कारण उसने तत्काल घटना की जानकारी किसी को नहीं दी।
मां को बताई पूरी घटना
अगले दिन पीड़िता की मां ने बेटी को परेशान देखकर उससे घटना के बारे में पूछा। तब बालिका ने पूरी बात अपनी मां को बताई। इसके बाद 12 नवंबर 2024 को उसकी मां निशातपुरा थाने पहुंची और लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर विवेचना शुरू की। विवेचना पूरी होने के बाद अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
12 वर्ष की थी नाबालिग
न्यायालय में अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य और तर्कों पर विचार करने के बाद आरोपी को संबंधित धाराओं में दोषी पाते हुए पांच वर्ष के सश्रम कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई।
पीड़िता की आयु 12 वर्ष से कम थी और उसके पिता की मृत्यु हो चुकी है। वह अपनी मां और भाई के साथ नानी के घर रहती है। उसके भविष्य को देखते हुए न्यायालय ने एक लाख रुपये प्रतिकर दिए जाने का आदेश भी दिया।