
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। नाबालिग बालिका को बहला-फुसलाकर सूरत ले जाने और उसके साथ दुष्कर्म करने के मामले में विशेष न्यायालय ने आरोपित विजय विश्वकर्मा को 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने आरोपित पर दस हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। वहीं, अपहरण के अपराध में दो वर्ष के सश्रम कारावास और एक हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
न्यायालय ने पीड़िता को चार लाख रुपये प्रतिकर देने का आदेश भी जारी किया है। यह फैसला विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो अधिनियम) व द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश मनोहरलाल पाटीदार की अदालत ने सुनाया। अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक अजय शंकर प्रजापति और ज्योति कुजूर ने पैरवी की।
अभियोजन के अनुसार, 30 मार्च 2024 को नाबालिग के माता-पिता ने कमला नगर थाने में बेटी के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने गुमशुदगी का प्रकरण दर्ज कर तलाश शुरू की। आठ अप्रैल 2024 को पुलिस ने बालिका को गुजरात के सूरत से बरामद किया। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि वह आरोपित विजय विश्वकर्मा को पहले से जानती थी।
दोनों के बीच फोन पर बातचीत होती थी। 29 मार्च 2024 को आरोपी ने उसे एमएसीटी चौराहे पर बुलाया। इसके बाद वह उसे रेलवे स्टेशन ले गया और ट्रेन से सूरत पहुंचा। वहां किराये के कमरे में उसकी इच्छा के विरुद्ध कई बार दुष्कर्म किया। दोनों वहां करीब सात से आठ दिन रहे, जिसके बाद पुलिस ने बालिका को बरामद कर लिया।
मामले में कमला नगर पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं और पॉक्सो अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर विवेचना की। जांच पूरी होने के बाद न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया। सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से पेश साक्ष्यों, दस्तावेजों और तर्कों से सहमत होकर न्यायालय ने आरोपित को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।
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