
डिजिटल डेस्क, भोपाल। राज्य में सड़कों की गुणवत्ता सुधारने और उनकी दीर्घकालिक सुरक्षा-मरम्मत सुनिश्चित करने के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) ने एक नई 'सड़क अनुरक्षण नीति' बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस नीति का मुख्य उद्देश्य सड़कों के मेंटेनेंस को प्रभावी और वित्तीय रूप से टिकाऊ बनाना है।
इस नीति का खाका तैयार करने के लिए लोक निर्माण विभाग ने 9 विशेषज्ञों की एक उच्चस्तरीय समिति बनाई है। IIT मुंबई के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. धर्मवीर सिंह को तकनीकी विशेषज्ञ के रूप में जिम्मेदारी दी गई है।
राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) जोन के मुख्य अभियंता को समन्वयक बनाया गया है। इसके अलावा NHAI, MPRDC, लोक निर्माण विभाग और वित्त विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को इसमें शामिल किया गया है।
यह समिति बीते चार वर्षों के दिशानिर्देशों की समीक्षा करेगी और नियमित रखरखाव, गुणवत्ता जांच और वित्तीय फंडिंग पर सुझाव देगी। समिति 30 सितंबर से काम शुरू करेगी और 30 अक्टूबर तक अपनी अंतिम रिपोर्ट प्रमुख सचिव को सौंपेगी। सड़कों के निर्माण से जुड़े पंजीकृत मजदूरों की कार्यकुशलता और तकनीकी क्षमता बढ़ाने के लिए सरकार ने एक और अहम फैसला लिया है।
लोक निर्माण विभाग ने एक अलग समिति बनाई है, जो मैदानी स्तर पर काम करने वाले श्रमिकों को आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण देगी। समिति श्रमिकों की मौजूदा क्षमताओं का आकलन कर उनकी जरूरत के आधार पर नया ट्रेनिंग मॉड्यूल और पाठ्यक्रम तैयार करेगी। इस पहल से एक तरफ जहां सड़कों और निर्माण कार्यों की उम्र बढ़ेगी, वहीं दूसरी तरफ श्रमिकों की आजीविका और भविष्य अधिक सुरक्षित हो सकेगा।